Evening post july 20

इंसान– चुपचाप यहाँ पर आया था, चुपचाप यहाँ से जाएगा  कम्बख्त न जाने क्यों फिर भी हर बात पे शोर मचाएगा। 

Evening post july 19 (1)

कभी-कभी मैं जिंदगी को आसमाँ में तैरते हुए पंछियों की भांति महसूस करता हूँ। शांत, उन्मुक्त आसमाँ में उसे उड़ता देखकर लगता है जैसे वहाँ शायद वह… Read more “Evening post july 19 (1)”