Ek Vichar

​बहुत संभव है कि ईश्वर एक गहरी नींद में हो और कोई सपना देख रहा हो। जिसमें हम महज़ कुछ किरदार हैं और हमारे किसी भी कर्म… Read more “Ek Vichar”

ग़ज़ल (2) 

​❤❤ . शफ़क़ के बाद सूरज वक्त यूँ गुजारता होगा फ़रोंज़ाँ चाँद कर तुझे रात भर निहारता होगा  . रोज इतनी निगाहों से तेरा महफूज़ यूँ होना… Read more “ग़ज़ल (2) “

सवाल

​माना जवाब उनका बवाल वाला था  सवाल भी उनका कहाँ सवाल वाला था।

दरख़्त। 

​दरख़्त जब रोते होंगे पत्ते रुख़्सत होते होंगे। दरख़्त– पेड़। रुख़्सत–अलग।