Rukna mat kabhi

रुकना मत कभी, बस चलते जाना..मंजिल दूर हो सकती है, पर मिलेगी जरूर। आखिर किसने बोला नामुमकिन है? उसने जिसने कभी कोशिश की ही नहीं या उसने जो जीतते-जीतते हार गया। थोड़ा और ठहरता तो जीत पक्की थी। खैर उसकी बात छोड़ते है, वह तो चला गया..पर तुम जाना नहीं। कुछ भी असंभव नहीं है यहाँ, लोग रोज नए कीर्तिमान रचते है। कहीं फँस गए हो तो फिर से शुरुवात करना, शायद यही वक्त की माँग है क्योंकि वजह ढूँढने निकलोगे तो बहुत पीछे छूट जाओगे। ख्वाहिशों की इमारतें बनाना, बहुत ऊँची, और उनमे ही रहने लगना। ऐसा करने से कुछ फर्क मिट जाएँगे।

जिन्दा रहने में और जिंदगी जीने में फर्क है। हर वह व्यक्ति जो साँस ले रहा है वह जिन्दा है, पर जिसने अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए दिल में एक उम्मीद जगा रखी है वह जिंदगी जी रहा है। समुंदर बनना, लहरें अपने आप उठेगी। खुद को पहचानना। कमजोर नहीं हो तुम, बिल्कुल भी नहीं, किसी से भी नहीं। बस थोड़े से अलग हो और यह अंतर ही तुम्हें आगे लेकर जाएगा, बहुत आगे। हारना, पर रुकना मत। मंजिल दूर हो सकती है पर मिलेगी जरूर।

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