Dil Maange More

“गुड मॉर्निंग दोस्तों, मैं हूँ आपका दोस्त Rj नीरज। वेल सूरज निकल चुका है और गर्मी बहुत तेज होने वाली है इसलिए मैं पूरी कोशिश करूँगा कि आज आप बाहर निकलने के बजाय घर बैठकर ही गर्मी का लुफ्त उठा सकें और हाँ अगर आप अपने संडे को और भी स्पेशल बनाना चाहते हैं तो अभी डाउनलोड करें हमारा एप और पाएं ढेरो मजेदार कहानियाँ और गाने बिल्कुल मुफ्त। चलिए अब मैं आप को सुनाता हूँ फिल्म बर्फी का ये गाना, ओह मेरा फ़ेवरिट– फिर ले आया” stay tuned

“यार प्रतीक तू सम्भाल लेना, अगर आज भी लेट हो गया तो चारु मेरी जान ले लेगी” मैंने चार्जिंग पॉइंट से अपना मोबाइल निकलते हुए कहा।

“Ok bro, have fun, पर ये आखरी बार हैं हाँ” उसने बिना देखे जबाब दिया।

“आगे कभी ऐसीं नौबत ही नहीं आएगी यार, बस आज का दिन और, कल JCS telecommunications के इंटरव्यू का रिजल्ट आ जाएगा। इस बार जॉब पक्की समझ। चल अब मैं निकलता हूँ, अगर जल्दी फ्री हुआ तो शाम को मिलूँगा।

इतना कहकर मैं पूरी रफ़्तार से ऑफिस से निकल गया। ऐसा पहली बार नहीं था जब प्रतीक ने ऑफिस से निकलने में मेरी मदद की थी। जब भी मुझे कुछ जरुरी काम होता तो प्रतीक बिना सोचे मेरी जगह ले लेता। सच कहूँ तो प्रतीक उन्हीं कुछ दोस्तों में से था जिसे आप रात को दो बजे भी कॉल करो तो वह आपके लिए आने को तैयार रहेगा, बसर्ते हर शनिवार उसको दो बोतल डाउन करने की जिम्मेदारी फिर आपकी। 

दरसअल आज पूरे बीस दिन बाद चारु अपने घर से वापिस आ रही थी। और उसे रेलवे स्टेशन से सुरक्षित घर छोड़ना मैं अपना परम कर्तव्य समझता था। चारु और मेरे मिलने के पीछे भी प्रतीक का ही हाथ था। हुआ यूँ की पिछले साल मेरे जन्मदिन पर मैंने अपने अपार्टेन्ट में एक अच्छी सी पार्टी का आयोजन किया। और उसी दिन प्रतीक की कॉलेज फ्रेंड यानी कि चारु शहर किसी काम से आयी हुयी थी। प्रतीक उसे अपने साथ मेरी बर्थडे पार्टी में ले आया। उस दिन तो कुछ खास बातचीत नहीं हुई। हाँ दोनों के फ़ोन नंबर जरूर एक्सचेंज हो गए। आज के युग में सोशल मीडिया किसी पंडित से कम नहीं है। बिना कुंडली देखे सब सेट कर देता है। बातें करते-करते मिलने का सिलसिला भी शुरू हो गया। और इस तरह मौका देखकर मैंने उसके जन्मदिन पर अपने दिल की बात उससे कह दी। उसने जब हँसकर अपने मोम-डैड से मेरा परिचय करवाया तो मैं समझ गया, कुंडली मैच हो चुकी है।

“हाय, कैसी रही जर्नी” मैंने चारु को लगे लगाते हुए कहा। 

“ठीक थी, एक्सप्रेस के नाम पर पैसेंजर की स्पीड से बुरा कोई एक्सपीरियंस नहीं हो सकता। अच्छा ये सब छोड़ो, यह बताओ इंटरव्यू कैसा रहा? 

“इंटरव्यू बहुत अच्छा था, I’m damn sure इस बार हो जाएगा”

“I hope so, अब चलें” उसने सामान उठाते हुए कहा”

हमने सामान ऑटो में रखा और उसके घर के लिए निकल गए। दरअसल शहर में उसके कई जान पहचान वाले रहते थे और उनका आना-जाना लगा रहता था इसलिए हम दोनों अलग-अलग घर में रह रहे थे। 

जहाँ ऑटोवाला नब्बे के दशक के कुछ रोमांटिक गाने सुनने में मसगूल था वहीँ हम दोनों एक दूसरे का हाथ थामकर बिना पलक झपकाएं एक दूसरे को देखे जा रहे थे। 

“परसों हमारे रिलेशनशिप को एक साल कम्पलीट हो जाएगा, इतना वक्त कब निकल गया पता ही नहीं चला” उसने चुप्पी तोड़ते हुए कहा।

“क्या कल शाम तुम मेरे फ्लैट पर आ सकती हो? मैं चाहता हूँ की जब इंटरव्यू का रिजल्ट आये तो मैं अपनी खुशी सबसे पहले तुम्हारे साथ शेयर करूँ”

“Ofcourse I’ll be there, hope सब ठीक हो”

उसे घर छोड़कर मैं अपने फ्लैट पर गया और कुछ जरुरी काम निपटाने लगा। अगले दिन मेरे कहे अनुसार शाम के चार बजते ही चारु मेरे घर आ पहुंची। हम दोनों बेसब्री से पाँच बजने का इंतेजार कर रहे थे। पता नहीं क्यों वह काफी परेशान दिख रही थी। पाँच बजते ही मैंने JCS में कॉल किया–

“Hello Sir, How can I help you?” उस तरफ से आवाज आयी। 

“जी क्या मैं जान सकता हूँ, लास्ट संडे जो ग्रुप बी का इंटरव्यू हुआ था उसका रिजल्ट आया कि नहीं” 

“Yes sir, results of group B are out. may I know your name?

“जी Neeraj dubey” मैंने कहा।

“Let me check sir, wait for a moment”

पूरा विश्वास होने के वाबजूद भी मैं घबराया हुआ था। और चारु लगातार इधर-उधर देखकर खुद को बहलाने की कोशिश कर रहे थी।

“Neeraj Sir, I’m sorry, better luck next time. Have a great day.”

“क्या, पर ऐसा कैसे हो सकता हैं I mean…”

फ़ोन डिसकनेक्ट हो चुका था। मैं अविश्वास में चारु को देख रहा था। चारु मेरे पास आई और मुझे गले लगाकर रोने लगी।

 
“जिसका डर था वही हुआ” उसने कहा।

“क्या मतलब” मैंने पूँछा।

“डैड ने घर से निकलने के पहले एक शर्त रखी थी, अगर इस बार तुम्हारी परमानेंट जॉब नहीं लगी तो हमें यह सब यहीं खत्म करना होगा”

“और तुमने क्या कहा”?

“मेरे पास कोई चॉइस नहीं थी, I Hope तुम…”

“Leave” मैंने चिल्लाकर कहा।

“पर नीरज”

“चारु जाओ यहाँ से। अभी…”

मैंने गुस्से में आकर उसे जाने के लिए कहा और दरवाजा बंद करके बेड पर लेट गया। ऐसा लगा ऐसे एक झटके में सब खत्म हो गया हो। मैं सब कुछ भूलकर सोने की कोशिश करने लगा।

रात को करीब पौने ग्यारह बजे किसी unknown नंबर से कॉल आया। 

“Hello, मैंने सिसकते हुए कहा।”

“Am I speaking to mr neeraj dubey?”

“जी हाँ बोल रहा हूँ”

“Sir we are extremely sorry, actually we have two Neeraj here with same surname, I just confirmed your name by your phone number. Congratulations Sir, you are selected for the post of marketing manager in JCS telecommunications. We will mail you the details soon. Good night sir”

“Thank you, good night”

इससे पहले जो मैंने अभी सुना उस पर यकीन करता। कोई door bell बजाता है। मैने जैसे ही दरवाजा खोला तो प्रतीक था। 

“हैप्पी बर्थडे bro!!!” प्रतीक ने गले लगाते हुए कहा। 

“अभी पूरा एक घंटा बाकी है प्रतीक” मैंने हल्की मुस्कराहट के साथ कहा।

“छोड़ न यार। अच्छा इससे मिल, ये है रुचिका मेरी कॉलेज फ्रेंड, कुछ जरुरी काम से शहर आयी हुयी है……”
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