Evening post

​हम अक्सर दूसरों को बुरा-भला कह देते हैं, बगैर यह जाने कि उसकी जिंदगी में क्या चल रहा है। वह किस अवस्था से गुज़र रहा है। वह जो भी कर रहा है कहीं उसके पीछे कोई ऐसी वजह तो नहीं जिसे वह आपके साथ साझा भी नहीं कर सकता और न ही उससे पीछा छुड़ा सकता है। ऐसे हालात में आपकी जरा सी बात भी किसी को बहुत चोट पहुँचा सकती है। ऐसा होता ही है। आपके साथ भी कई बार हुआ ही होगा। जब आप चाहते हुए भी कुछ नहीं कह पाते। बस मन-ही-मन यह प्रार्थना करते हैं कि लोग आपको समझें आपका साथ दें ताकि सही वक्त आने पर आप उन्हें सच से रूबरू करा सकें। मानव जात बेहद संवेदनशील होती है। वह खुशियों का तो खुलकर आनंद लेती है पर पीड़ा उजागर करने से कतराती है। उसे छुपाती है मुस्कान के पीछे और हर चाहने वाले से अपेक्षा करती है कि वह इस झूठे लिबास के पीछे छुपे मनुष्य को पहचान कर उसे सहानुभूति की गोद में छुपा सके। हमें जरुरत है कि हम ऐसे व्यक्तित्व की पहचान कर उसके साथ प्रेम से पेश आयें ताकि वह अपना दर्द हमसे साझा कर सके और अंदर ही अंदर घुटने से बच सके।

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3 thoughts on “Evening post

  1. सही विचार है आपके अमित। अक्सर हम अपनी परेशानिया और मन का बोझ किसी से भी साझा नही कर पाते।

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