The Magician: Story 

Present day–

1 January 2003
zumba club London–

‘I haven’t even heard his name before…please don’t kill me’ said Reywen.

‘Ok..ok..fine, You have less than a minute, Now tell me where the hell is Nicholas’ Harman wasn’t in good mood.

‘I don’t know, believe me…I don’t know…please let go of me’

’30 seconds’ Harman said looking at his watch.

‘wait wait…please…yesterday….a friend of mine told me that he was last seen in Vegas…I don’t know anything else’ Reywen said begging for his life.

‘Well in that case, you are just another useless creature on this earth….Happy new year Reywen.

गन चलने की आवाज़ नए साल के जश्न में दब जाती है। हरमन चुपचाप वहाँ से निकलकर अपनी शर्ट बदलता है और गन वहीं डस्टबिन में छुपाकर सीधे होटल ग्रैंड पहुँचता है जहाँ वेनिशा उसका पहले से इन्तजार कर रही थी।

‘Happy new year हरमन’ वेनिशा ने हरमन को गले लगाते हुए कहा।

‘वेनिशा अपना सामान पैक करो, we have to leave this place right now’ हरमन ने अपना बैग उठाते हुए कहा।

‘And what do you mean by this place’ वेनिशा आश्चर्यचकित थी।

‘हम आज रात ही इंडिया के लिए निकल रहे हैं’

‘What! look I’m not going anywhere….we had no such a plan हरमन’ वेनिशा ने चिल्लाते हुए कहा।

‘Plans change with time वेनिशा, now please stop acting like a kid and pack your bag’

न चाहते हुए भी वेनिशा अपना सामान पैक करती है और दोनों रात को ही गोवा के लिए निकल जाते हैं। जहाँ एक तरफ हरमन को निकोलस की तलाश थी वहीं दूसरी तरफ वेनिशा हरमन के व्यवहार में अचानक से आये इस बदलाव को लेकर परेशान थी। हरमन के पास ज्यादा वक्त नहीं था। वह किसी भी हालत में निकोलस तक पहुँचना चाहता था। 

गोवा पहुँचते ही हरमन ने ऑटो बुक की और दोनों घर के लिए निकल गए। दोपहर का वक्त था। घर पहुँचते ही वेनिशा ने फ्रिज में पड़ी ब्रेड्स से कुछ सैंडविच तैयार किए और उन्हें लेकर बेडरूम में पहुँची जहाँ हरमन फ़ोन पर किसी से बात करने में व्यस्त था। 

‘किसका फ़ोन था हरमन?’ वेनिशा ने प्लेट बेड पर रखते हुए कहा।

‘मिस्टर दीवान’ हरमन ने फ़ोन रखते हुए कहा। 

‘दीवान जी, क्या कहा उन्होंने? आजकल रेंट लेने भी खुद नहीं आते’ 

‘वो यह घर बेंचना चाहते हैं। दस दिन का वक्त दिया है, उसके बाद हमें यह घर खाली करना होगा’

‘क्या? पर ऐसे अचानक, क्यों?’ वेनिशा ने चिंतित होकर कहा।

‘कह रहे थे इस घर की उन्हें अच्छी कीमत मिल रही है, इसे बेचकर वह अपनी पत्नी, मिसेज दीवान के साथ वापिस अपने होमटाउन नागपुर जाना चाहते हैं’ हरमन ने स्पष्ट किया।

‘पर इतनी जल्दी नए घर में शिफ्ट करना तो नामुमकिन है’ वेनिशा ने कहा।

‘उसकी जरुरत नहीं पड़ेगी। मैंने सोच लिया है, हम वापिस कोलकाता जाएंगे’

‘क्या! ये तो बहुत अच्छी बात है, मैं तो कब से तुमसे…’

‘वेनिशा मैं चाहता हूँ कुछ दिन के लिए तुम अपने अंकल के पास चली जाओ’ हरमन ने वेनिशा को बीच में रोकते हुए कहा।

‘पर क्यों?’

‘फिलहाल तो मैं इसका जवाब नहीं दे सकता। बस कुछ ऐसा है जिसे पूरा किए बिना मैं यहाँ से नहीं जा सकता। अगले हफ्ते मैं यू.एस जाने वाला हूँ। मैं चाहता हूँ उससे पहले तुम्हें तुम्हारे अंकल के यहाँ छोड़ दूँ’ हरमन ने साफ़ किया।

‘मैं नहीं जानती ऐसी क्या बात है जिसको लेकर तुम इतना परेशान हो। और जानना भी नहीं चाहती। गलती शायद मेरी ही है। मुझे कभी तुम्हें उस चर्च तक लेकर जाना ही नहीं चाहिए था। जब से हम वहाँ गये हैं एक दिन हमने अच्छे से साथ नहीं गुज़ारा। शाम को देर से आते हो फिर गेराज के काम में लग जाते हो। मैं बस इतना चाहती हूँ कि सब पहले की तरह ठीक हो जाए’ वेनिशा उदास थी।

‘मुझे कुछ दिन का वक्त और दो वेनिशा, मैं वादा करता हूँ, सब पहले जैसा हो जाएगा’ 

‘मैं जानती हूँ हरमन। क्या मैं एक बात कहूँ?’

‘बोलो’

‘क्यों न कोलकाता वापिस जाकर तुम फिर से अपना मैजिक थियेटर शुरू कर दो। मैं जानती हूँ यह थोड़ा मुश्किल है, पर मैं यह भी जानती हूँ कि तुम्हारी सेविंग्स लगभग खत्म होने को है। ऐसे में ये छोटे-मोटे काम करके कब तक खुद को तकलीफ़ दोगे’ वेनिशा ने हरमन का हाथ थामते हुए कहा।

‘नहीं वेनिशा। तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं मैंने उसकी वजह से क्या खोया है। It’s a bloody trap, मैं कुछ भी कर लूँगा पर अब उस दुनिया में वापिस कदम नहीं रखूँगा’ हरमन के चेहरे पर गुस्से की लकीरें साफ़ देखी जा सकती थीं। 

कुछ लोग कहते हैं कि जादू सिर्फ आँखों का धोखा है। और कुछ लोगों का मानना है कि अगर अपनी क्षमताओं का सही इस्तेमाल किया जाए तो हम असंभव भी कर सकते है–

15 days Ago

December 2002–

The Magician page no.7-8

“मास्टर लॉरेन सच कहा करते थे। यह पूरी दुनिया आप पर सिर्फ तब तक मेहरबान है जब तक आपके पास उन्हें दिखाने के लिए कोई ऐसी ट्रिक है जो आपके अलावा और कोई नहीं कर सकता। लोग हमेशा वही देखना पसंद करते हैं जो असंभव है, जो सिर्फ उनकी कल्पनाओं तक सीमित है। अगर आप उनकी कल्पनाओं के विपरीत कुछ करने की कोशिश करते हैं तो आप उनके अनुसार मनुष्य की निर्धारित क्षमताओं को पार कर जाते हैं। और बनते हैं एक ऐसे कलाकार जिसे पूरी दुनिया “जादूगर” कहती है।

“चर्च बंद करने का वक्त हो गया है हरमन” चर्च में मौजूद फादर ने हरमन की तरफ बढ़ते हुए कहा। 

“ओके फादर, मैं कल फिर आऊँगा” हरमन ने डायरी बंद की और उठ कर जाने लगा। 

“हरमन, क्या मैं एक बात पूछ सकता हूँ?” 

“ऑफ़ कोर्स फादर, आपको कुछ भी पूछने के लिए इजाजत लेने की जरुरत नहीं है”

“इंडिया में और भी कईं जादूगर हैं, फिर फ्रांसिस ही क्यों? ऐसी क्या ख़ास बात है उसमें जो तुम्हें रोज यहाँ इस चर्च तक खींच लाती है”

“कुछ लोग ख़ास होते हैं फादर। जिनमें कुछ ऐसा कर-गुज़रने की क्षमता होती है जो आम इंसान की पहुँच से बाहर है। फ्रांसिस उन्हीं में से एक थे”

“फ्रांसिस को हमेशा लगता था कि एक दिन कोई न कोई जरूर उसकी काबिलियत को न सिर्फ सही मायने में पहचानेगा बल्कि उसके अधूरे काम को भी पूरा करेगा। जादू को एक नई परिभाषा देगा” फादर ने डायरी वापिस सेफ में रखते हुए कहा।

“मैं चलता हूँ फादर, कल फिर आऊँगा” इतना कहकर हरमन वहाँ से निकल जाता है। 

करीब एक महीने पहले हरमन अपनी पत्नी वेनिशा के साथ छुट्टियाँ बिताने गोवा आया हुआ था। यहाँ आकर जब उसे पता चला कि यहाँ की सबसे पुरानी चर्च के पादरी “मार्शन ओलिवर” इंडिया के महान जादूगर जिमी फ्रांसिस के पुराने दोस्त हैं तो उसने कुछ दिन और गोवा में रुकना तय किया। वह मार्शन का विश्वास जीतने के लिए रोज चर्च जाने लगा। कुछ दिनों बाद जब उसे लगा कि मार्शन अब उसकी मदद कर सकता है तो उसने मार्शन से फ्रांसिस के बारे में बात की। जिसके बदले उसके हाथ लगी एक ऐसी डायरी जिसमें फ्रांसिस की मौत के ठीक एक दिन पहले तक की हर घटना का जिक्र था। जिसे खुद जादूगर फ्रांसिस ने लिखा था। हरमन फ्रांसिस की जादुई कलाओं से काफी प्रभावित था। वह किसी ऐसे रहस्य की तलाश में था जिसके बारे में सिर्फ फ्रांसिस ही जानता था। खुद का और वेनिशा का खर्च उठाने के लिए उसने गोवा में एक गेराज खोला और किराए से घर लेकर वही रहने लगा। 

चर्च से निकलने के बाद हरमन सीधे अपने घर पहुँचा। घर पहुँचकर देखा तो वेनिशा सोई हुई थी। उसे जगाने के बजाय हरमन ने किचन में जाकर खुद के लिए खाना परोसा और खाना खाने के बाद गेराज जाकर किसी पुरानी गाड़ी की मरम्मत में लग गया। हरमन के दिन की शुरुवात गाड़ियों की मरम्मत से शुरू होकर उन्हीं पर खत्म हो जाती थी। कभी-कभी कुछ लोग जरूर उससे मिलने आ जाया करते थे, जिनके बारे में वेनिशा जब भी पूछती तो वह उसे यह कहकर शांत कर देता कि यह सब उसके पुराने दोस्त हैं जो कोलकाता में उसके शो मैनेज करते थे। इसके अलावा न तो उसे किसी चीज से ख़ासा लगाव था और न ही वह किसी से ज्यादा देर तक मिलना पसंद करता था। सिवाय चर्च में रखी जादूगर फ्रांसिस की डायरी के। वह जितनी जल्दी हो सके उस डायरी को पढ़कर खत्म करना चाहता था। पर ऐसा संभव नहीं था। डायरी को बहुत ही सुरक्षित सेफ में रखा गया था जिसकी जिम्मेदारी खुद फादर मार्शन की थी। 

रात के बारह बजते ही उसने गाड़ी के पुर्जों को वापिस जोड़ा और अपने कमरे में जाकर सोने की कोशिश करने लगा। उसे आज भी याद है कि किस तरह बचपन में वह अपने दोस्त फैज़ान को अपने दादाजी से सीखी हुईं जादू की कुछ कलायें दिखाया करता था, जिसे देखकर फैज़ान को लगता था कि वह सच में जादू कर सकता है। जब भारत-पकिस्तान बॉर्डर के पास मौजूद कश्मीरी इलाकों में हुए सांप्रदायिक दंगों में फैज़ान के अम्मी-अब्बू की मौत हुई तो वह भागता-भागता उसके पास आया। उसे लगा कि हरमन शायद कुछ जादू करके उसके अम्मी और अब्बू की जान बचा सकता है। पर हरमन के दादाजी ने उसे सिर्फ लोगों को बेवक़ूफ़ बनाया सिखाया था। किसी की जान बचाना नहीं। उस दिन के बाद फैज़ान कभी हरमन से नहीं मिला। और महज दस साल के हरमन के दिमाग में यह बात बैठ गई की वह बड़ा होकर एक ऐसा जादूगर बनेगा जो लोगों को धोखा देने के बजाय अपने जादू से उनका दिल जीत सके। जो जादू की निर्धारित सीमाओं को तोड़ सके। और ऐसा हुआ भी। फ्रांसिस के बाद अगर कोलकाता में लोग किसी जादूगर को जानते थे तो वह हरमन था। पर एक दिन हरमन ने अचानक जादू की दुनिया को अलविदा कह दिया। और कुछ ही दिनों बाद वेनिशा से शादी करके एक आम जिंदगी जीने लगा।

अगले दिन सुबह हरमन रोज की तरह बाजार से कुछ सब्ज़ियाँ और अखबार लेने गया गया हुआ था। जब वह वापिस आया तो देखा नीचे हॉल में वेनिशा किसी से बात कर रही थी। 

‘लो आ गए। हरमन ये मिस्टर अभिमान शाह हैं। इनका ड्राइवर कल इनकी गाड़ी हमारे गेराज छोड़ कर गया था। ये उसे ही लेने आये हैं’ वेनिशा ने अपनी कुर्सी से उठते हुए कहा।

‘ओह हाँ, याद आया। Nice to meet you मिस्टर शाह’ हरमन ने हाथ आगे बढ़ाया।

‘हेलो हरमन, मुझे आशा है उसकी मरम्मत हो चुकी होगी’

‘जी बिल्कुल। कल रात आखरी कार आपकी ही थी। सिर्फ इंजन में थोड़ी प्रॉब्लम थी। बाकी सब ठीक है’

‘थैंक यू सो मच हरमन। क्या वह ले जाने की स्थति में है?’ अभिमान ने सवाल किया। 

‘हाँ जरूर, मेरे साथ आइए’ हरमन उसे गेराज की तरफ लेकर गया। 

हरमन मिस्टरर शाह को गेराज तक लेकर जाता है। वहाँ जाकर वह गाड़ी को एक बार फिर से चेक करता है और सब कुछ ठीक होने पर उसकी चाबी उन्हें सौंप देता है।

‘मिस्टर शाह ये एक रिपेयरिंग फॉर्म आप भर दीजिए। अगली बार अगर आपकी गाड़ी में कोई दिक्कत हुई तो आपको पूरा पेमेंट नहीं करना पड़ेगा’

‘आप बुरा न माने तो एक बात पूछ सकता हूँ?’ मिस्टर शाह ने फॉर्म भरते हुए कहा।

‘Yaa sure’ हरमन मुस्कुराया।

‘आप देखने में काफी पढ़े-लिखे लगते हैं, फिर यहाँ ये इतनी छोटी सी दुकान। बात कुछ समझ नहीं आयी’

‘दरअसल हम कोलकाता के रहने वाले हैं। वहाँ हमारा खुद का घर है बिज़नेस है। यहाँ तो मैं कुछ दिनों के लिए आया हूँ तो यूँ ही वक्त काटने के लिए। मेरे पिताजी मैकेनिक हुआ करते थे। तो गेराज का काम मैंने उन्हीं से सीखा है’ हरमन ने जवाब दिया।

‘अब बात कुछ जमी। अच्छा मैं चलता हूँ। आपसे मिलकर अच्छा लगा’ अभिमान शाह ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा। ‘एक और बात, आज से ठीक 6 दिन बाद मेरी वाइफ की बर्थडे पार्टी है, आप वेनिशा के साथ मेरे घर आएंगे तो उसे अच्छा लगेगा’

‘Thank you mister shah, but I dont think मैं आ पाऊँगा’

‘C’mon हरमन, कम-से-कम जब तक आप दोंनो यहाँ हैं तब तक तो मुझे अपना दोस्त मान ही सकते हैं। इसी बहाने मेरी वाइफ का भी मन बहल जाएगा। उसके यहाँ ज्यादा दोस्त नहीं हैं’ अभिमान ने अनुरोध किया।

‘Ok fine Mr shah, we will be there. And thank you so much for inviting us’ हरमन मान गया। हरमन के इनविटेशन स्वीकार करते ही अभिमान शाह ने छोटी सी मुस्कान दी और वहाँ से निकल गया।

 
सर्दियों के मौसम में दोपहर निकलते वक्त नहीं लगता। भीड़-भाड़ वाले इलाके में घर होने के कारण हरमन का गेराज का काम भी ठीक-ठाक चल रहा था। शाम होते ही हरमन ने गेराज लॉक किया और चर्च के लिए निकल गया। वहाँ पहुँचते ही उसने बिना देर किए मार्शन से डायरी ली और चर्च के बगल में बनी लाइब्रेरी में जाकर पढ़ना शुरू किया।

The Magician page no.11-17

‘मेरा जन्म कोलकाता के एक क्रिस्चियन परिवार में हुआ। मेरे दादाजी ब्रिटिश ऑफिस में काम किया करते थे। वह उनकी नीतियों और काम करने के तरीके से काफी प्रभावित थे। उन्होंने ही मेरा नाम फ्रांसिस रखा। 1947 में जब देश आजाद हुआ तो उन्हें ब्रिटिश गवर्नमेंट में काम करने के लिए काफी नफरत झेलनी पड़ी। तब डैड का जन्म हो चुका था। दादाजी ने डैड का भविष्य सुरक्षित करने के लिए बॉम्बे छोड़ दिया और कोलकाता में आकार रहने लगे। जब मैं बड़ा हुआ तो दादाजी मुझे राजकुमार या भूत प्रेत की कहानियों के बजाय ब्रिटिश राज में हुयी घटनाएँ सुनाया करते थे। या बताया करते थे कि किस तरह द्वितीय विश्व युद्ध में ऐसी अफगाह थी कि नाज़ी जर्मनी युद्ध जीतने के लिए काला जादू का इस्तेमाल कर रही है। सच जो भी हो पर वह हमेशा कहते थे कि इंसान का शक्तिशाली होना ही मायने रखता है। तरीका चाहे जो भी हो। समय के साथ हालाँकि उन कहानियों को सुनाने का कोई मतलब नहीं था पर वह चाहते थे कि बड़ा होकर मैं यह समझ सकूँ कि उन्होंने कभी किसी अपने पर अत्याचार करने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट का साथ नहीं दिया। बल्कि वहाँ काम करके उन की हर मदद करने का जिम्मा उठाया, जिसका परिणाम यह हुआ कि उनका घर जमीन सब छिन गया। दादाजी और माँ के विचार काफी अलग-अलग थे। उन्होंने मुझे मोम की जगह माँ कहना सिखाया। माँ कोलकाता के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया करतीं थीं। जब मैं छह साल का हुआ तो माँ ने उसी स्कूल में मेरा दाखिला करवा दिया। मैं हमेशा से ही शांत था। न कोई सवाल न कोई जवाब। इस बात का एहसास मुझे तब हुआ जब में 10 साल का हुआ। दादाजी के गुज़रते ही मैं बिल्कुल अकेला पड़ गया। डैड हमेशा काम को ही तवज़्ज़ो देते थे। जो झगड़े दादाजी संभाल लिया करते थे वह अब खुलकर मेरे सामने आने लगे थे। डैड और माँ के बीच की लड़ाई में मैं कहीं न कहीं दबता जा रहा था। माँ ने स्कूल की नौकरी भी छोड़ दी थी। अब वह किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब करती थीं। डैड भी ऑफिस से लेट आने लगे थे। रोज मैं चुपचाप जाकर क्लास में बैठता और यह प्राथना करता कि किसी तरह मैं होमवर्क न करने की वजह से मिलने वाले पनिशमेंट से बच जाऊँ। पर एक दिन मेरे मैथ्स टीचर फर्नांडिस सर ने मुझे पकड़ लिया और क्लास से बाहर निकाल दिया। 

स्कूल की छुट्टी होने में अभी वक्त था इसलिए मैं बाहर गार्डन में जाकर बैठ गया। कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक 35-40 साल का आदमी सामने वाली जर्जर हो चुकी बिल्डिंग में बैठकर जमीन पर कुछ लकीरें खींच रहा है। मैं पास पहुंचा तो पाया वह देखने में काफी अजीब था। सांवला रंग, भूरी आँखें, मैले कपड़े और उसके शरीर से बदबू आ रही थी जैसे बहुत दिनों से नहाया ही न हो। मुझे देखते ही वह घबराकर पीछे की ओर खिसक गया। 

‘आप कौन हैं? और यहाँ क्या कर रहे हैं?’ मैंने डरते हुए किसी तरह पूछने की हिम्मत की।

‘जाओ यहाँ से, भाग जाओ, वरना तुम भी मेरी तरह बीमार हो जाओगे’ उसने लकीरें बनाना जारी रखा।

उस दिन मैं डरकर वहाँ से भाग गया। मैंने उसे पहले कभी नहीं देखा था। या शायद कभी ध्यान न दिया हो। मैंने दूसरे दिन जानबूझकर मैथ्स का होमवर्क नहीं किया ताकि मुझे फिर से उससे मिलने के लिए कुछ वक्त मिल सके। 

‘हरमन’ मार्शन ने आवाज़ दी।

‘जी फादर, बस दो मिनट’ हरमन ने कुछ और वक्त माँगा।
रोज यही सिलसिला चलने लगा। हरमन घर जाकर गेराज और घर के कुछ काम देखता और शाम होते ही चर्च जाकर फ्रांसिस की अधूरी डायरी को पढ़ना शुरू कर देता। 

The Magician page no. 19-23

आज फिर जब मुझे क्लास से निकाला गया तो मैं सीधा उस आदमी के पास पहुँचा। वह उसी जगह बैठकर फिर से अपनी उँगलियों से जमीन पर वही लकीरें उकेर रहा था। आज मुझे देखकर वह घबराया नहीं।

‘तुम फिर आ गए’ उसने बिना सिर उठाए कहा। उसके बोलने के तरीके से मुझे लगता नहीं था कि वह शुरुवात से ही ऐसा गरीब और लाचार रहा होगा। 

‘आज फिर होमवर्क न करने की वजह से फर्नांडिस सर ने मुझे क्लास से बाहर निकाल दिया’ मैंने मासूमियत से जवाब दिया’

‘क्या तुम खुद अपना होमवर्क भी नहीं कर सकते’ इस बार पहली बार उसने मेरी आँखों में देखकर बात की। 

‘नहीं। मुझे मैथ्स सॉल्व करना नहीं आता’ मैंने जवाब दिया।
‘तो घर पे कोई तो होगा’ उसने पूछा।

‘डैड और माँ दोनों के बीच में झगड़ा होता रहता है इसलिए दोनों में से कोई मुझे होमवर्क करने में मदद नहीं करता’ मेरे इतना कहते ही वह शांत हो गया।

‘क्या हुआ रहनुमा?’ मैंने पूछा।

‘मेरा भी एक बेटा था। ठीक तुम्हारे जितना। जो कभी अपना स्कूल होमवर्क नहीं कर पाता था। क्योंकि उसके माँ और बाबा हमेशा झगड़ते रहते थे। और फिर एक दिन झगड़ा इतना बड़ गया कि उसकी माँ ने उसके साथ खुदखुशी कर ली और उसके बाबा को हमेशा के लिए तड़पने के लिए इस हालत में छोड़ दिया’ उसकी आँखों में आंसू थे।
 
मैंने अपने बैग से पानी की बोतल और लंचबॉक्स निकाला और उसे दे दिया। उसने बिना देर किये टिफ़िन खोला और खाना खाने लगा। हालाँकि मैं उम्र में उस वक्त छोटा था पर उसकी कहानी सुनकर मुझे बहुत अफ़सोस हुआ। 

‘अभी क्या कहा तुमने मुझे’ उसने पानी की बोतल खोलते हुए कहा’

‘क्या?’ 

‘मेरा नाम, क्या बोल था? रहनुमा?’

‘हाँ ये तुम्हरी शर्ट पे लिखा ना, ये देखो’ मैंने उसे दिखाते हुए कहा।

‘ओह ये, ये तो टेलर लोग जो लगाते हैं उनका टैग है। रहनुमा टेलर्स’ वह पहली बार हँसा।

‘अच्छा नाम है “रहनुमा” अंकल’ मैं भी हँसा।

‘हाँ बस लड़कियों की तरह लगता है, जैसे रहनुमा आंटी’ वह जोर से हँसने लगा। 

The Magician page no. 24-28

रहनुमा के आते ही ऐसा लगा जैसे दादाजी की कमी पूरी हो गयी हो। वह मुझे मैथ्स का होमवर्क करने में मदद करने लगा। मैंने अपनी पॉकेट मनी से उसके लिए कुछ जरुरी सामान जैसे टूथ ब्रश, साबुन वगैरह खरीदकर दे दिया। जब कभी डैड और माँ दोनों घर से बाहर होते मैं उसे घर लेकर जाता और हम पूरे दिनभर बातें करते। रहनुमा मेरे लिए एक दोस्त की तरह हो गया था। एक ऐसा दोस्त जो हर कोई चाहता है।
 
कभी-कभी हालाँकि मुझे घर देर से जाने के लिए डाँट जरूर पड़ती थी पर मैंने कभी रहनुमा का राज़ किसी को नहीं बताया। मेरे आलावा जैसे वह इस दुनिया में किसी के लिए मौजूद ही नहीं था। 

सब कुछ ठीक चल रहा था। आज माँ और डैड जरुरी काम से बैंक गये हुए थे। मैं और रहनुमा घर पर रखी कहानियों की किताब पढ़ने में मग्न थे। तभी डैड ने घर के लैंडलाइन पर कॉल करके बताया कि हमें शाम को सरथ अंकल के घर पार्टी में जाना है इसलिए उनके वापिस आने से पहले मैं तैयार हो जाऊँ। फ़ोन रखते ही मैंने अपने कपडे बदले और रहनुमा को वहाँ से जाने के लिए कहा। रहनुमा के जाने के कुछ ही देर बाद डैड और माँ घर पर आए और अपने कपड़े ठीक करने के बाद मुझे लेकर सरथ अंकल के घर के लिए निकल गए। 

सरथ अंकल बॉम्बे में रहते थे और कभी-कभी कोलकाता आया करते थे। मेरे दादाजी और सरथ अंकल के पिताजी दोनों बॉम्बे में साथ में काम करते थे। जब दादाजी कोलकाता आये तो सरथ अंकल और डैड का साथ छूट गया। पर वह जब भी कोलकाता आते थे तो डैड से मिलना नहीं भूलते थे। उन्होंने बॉम्बे में कोई नया बिजनेस शुरू किया था जिसकी पार्टी उन्होंने अपने कोलकाता वाले पुराने घर में रखी थी। वहाँ जाकर पता चला की वह अपना घर बेंचने वाले हैं इसलिए आखरी बार वहाँ सेलिब्रेट करना चाहते थे। बड़े-बड़े लोगों से भरी महफ़िल में मैं अपना मन बहलाने के लिए सरथ अंकल के बच्चों के साथ खेलने लगा। पर कुछ देर बाद जब मुझे लगा कि वह मुझमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं तो मैं चुपचाप एक कोने में जाकर बैठ गया और पार्टी खत्म होने का इंतजार करने लगा।

The Magician page no. 30-33

पार्टी खत्म होते ही डैड ने मुझे गोद में उठाया और गाड़ी तक लेकर गए। ठण्ड की वजह से रास्ते में काफी कोहरा छाया हुआ था। माँ पिछली सीट पर बैठकर अपनी उँगलियों से मेरा सिर सहला रहीं थी। थोड़ी देर बाद एक जोरदार टक्कर की वजह से मेरी नींद खुल गयी। सामने से आने वाली किसी कार ने हमारी गाड़ी को टक्कर मार दी थी। 

‘मैं देखता हूँ। तुम दोनों यहीं रुको’ डैड गाड़ी से नीचे उतर गये।

‘क्यों बे साले दिखाई नहीं देता क्या’ जिस गाड़ी से टक्कर हुयी थी उसमें से एक आदमी ने उतरते हुए कहा। 

‘देखिए भाईसाहब कोहरे की वजह से देखने में गलती हो गयी और ऊपर से आपकी गाड़ी की एक हेडलाइट भी बंद है’

‘हॉर्न तो सुनाई देता है ना? एक तो मोड़ पर इतनी तेज गाड़ी चलाता है और ऊपर से अब मुझे ही दोष दे रहा है’ वह चिल्लाने लगा।

‘देखिए आपका जो भी नुक्सान हुआ है ये मेरा कार्ड रखिए, कल आकार रिपेयरिंग में आने वाला पूरा खर्चा ले लेना’ डैड लड़ने के मूड में नहीं थे।

‘अपना कार्ड अपने पास ही रख’ उसने डैड को धक्का दे दिया।

‘हद होती है बदतमीजी की, आप तो सिर पर चढ़े जा रहे हैं’ यह सब देखकर माँ भी गाड़ी से उतर गयीं। 

उसने माँ से बदतमीजी शुरू कर दी। जिसके बदले में डैड ने उसे जोरदार थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ इतना तेज था कि वह सीधा जमीन पर गिर गया। मैं काफी डरा हुआ था। 

उसके गिरते ही जैसे ही माँ और डैड मुड़े किसी ने उन दोनों के सिर पर बारी-बारी से लोहे की रॉड से वार किया। मेरी चींख डर की वजह से अंदर ही अंदर दब गयी। उसने काले कपड़े पहन रखे थे। अँधेरा होने की वजह से मैं उसका चेहरा नहीं देख पाया। हमला करने के बाद उसने अपनी जेब से रुमाल निकालकर अपना चेहरा ढक लिया। उसने हमारी कार में रखा एक बैग उठाया जिसमें माँ की ज्वेलरी रखी हुयी थी जो उन्होंने पार्टी से लौटते वक्त उतारकर रखी थी और मुझे उंगली से शांत रहने का इशारा करते हुए वहाँ से निकल गया। उनके वहाँ से जाते ही मैं बाहर निकला और जोर-जोर से रोने लगा। उनके सिर से काफी खून निकल रहा था। मैं। मदद के लिए पुकार रहा था पर रास्ता इतना सुनसान था कि वहाँ एक परिंदा भी नज़र नहीं आ रहा था। माँ की आँखें धीरे-धीरे बंद हो रही थीं। डैड अब भी साँस ले रहे थे। उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया।

‘फ्रांसिस, सन, तुम अभी सरथ अंकल के पास जाओ। कल शाम होते ही तुम उनके साथ बॉम्बे जाओगे और फिर कभी यहाँ कदम नहीं रखोगे’ उन्होंने कहा।

‘डैड..’ मैं बस इतना कहकर रोने लगा। एक 13 साल के बच्चे पर उस वक्त क्या गुज़र रही थी यह सिर्फ वही जानता था।

‘सब ठीक हो जाएगा फ्रांसिस, मेरी तरफ देखो। मेरी जेब में एक डायरी है जिसमें सरथ अंकल का नंबर है। यहाँ आस-पास पीसीओ जरूर होगा, उन्हें कॉल कर के बुला लेना, सब ठीक हो जाएगा’

डैड मुझे बार-बार यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि सब ठीक होगा। और मैं लगातार रोये जा रहा था। 

उन्होंने मेरा हाथ थामा ‘सरथ अंकल तुम्हें एक डायरी देंगे जो बेहद खास है। उसे हमेशा संभालकर रखना। वह गलत हाथों में नहीं पड़नी चाहिए फ्रांसिस, किसी भी कीमत पर। हमेशा याद रखना फ्रांसिस, हम इसलिए नहीं हारते क्योंकि हम कमजोर होते हैं, हम हारते हैं क्योंकि हम खुद पर विश्वास नहीं कर पाते। अच्छा बुरा जो भी करो, हमेशा खुद पर विश्वास रखना’ यह उनके आखरी शब्द थे।
 
मैंने किसी तरह पीसीओ ढूंढकर सरथ अंकल को फोन किया। सरथ अंकल ने आते ही पुलिस को बुला लिया। जब पूछताछ हुयी तो मैं उनकी कुछ ख़ास मदद नहीं कर पाया। उनमें से एक का चेहरा जरूर मैंने देखा था पर मुझे इस बात का इतना गहरा सदमा बैठ गया था कि मैं कुछ भी कहने और सुनने की स्थिति में नहीं था। मैं किसी से बात ही नहीं कर पा रहा था। अंकल के कहने पर पुलिस ने मुझे अकेला छोड़ दिया। अगले दिन सुबह होते ही डैड को दफनाया गया और माँ को हिन्दू रीति-रिवाज़ों के अनुसार मैंने अग्नि दी। 

वक्त के साथ मैं और ज्यादा खामोश होता जा रहा था। अपनी इच्छा के विपरीत मुझे कोलकाता छोड़ना पड़ा। उसी दिन शाम को सरथ अंकल मुझे उनकी फैमिली के साथ बॉम्बे ले गए। उन्होंने मेरा एडमिशन एक अच्छे स्कूल में करवा दिया। धीमे-धीमे सब कुछ पहले की तरह ठीक होने लगा। जब मैं 16 साल का हुआ तो सरथ अंकल ने मुझे वह डायरी दी जिसका डैड ने जिक्र किया था। वह कितनी ख़ास थी इसका अंदाज़ा लगा पाना मेरे लिए जरा मुश्किल था। उसमें लिखी भाषा और चिन्ह मेरी समझ के परे थे। फिर भी डैड के कहे अनुसार मैंने उसकी हिफाजत का जिम्मा उठाया और उसे हमेशा संभालकर रखा। समय तेजी से भाग रहा था। कॉलेज खत्म होते ही मैंने सरथ अंकल के बेटे के साथ बिज़नेस करना सीखा और अंकल का कारोबार देखने लगा। 

The Magician page no. 35-40

आज मेरा चौबीसवां जन्मदिन था। अंकल ने घर में एक छोटी सी पार्टी रखी थी। पार्टी के दौरान उन्होंने यह घोषणा की कि उनकी कोलकाता वाली कंपनी वह मेरे नाम कर रहे हैं। मैं खुश था, साथ-ही-साथ इस बात का दुःख भी था कि मुझे सब लोगों को छोड़कर वापिस कोलकाता शिफ्ट होना पड़ेगा। पर अंकल ने जो कुछ भी बचपन से लेकर आज तक मेरे लिए किया था उसके बदले में ये तो कुछ भी नहीं था।
पार्टी खत्म होने के बाद अंकल ने मुझे अकेले लॉन में बुलाया।

‘तुम खुश तो हो न बेटा? मेरा मतलब अगर तुम चाहो तो मैं अपना फैसला बदल सकता हूँ। बॉम्बे में भी हमारा काफी कारोबार है पर कोलकाता वाली कंपनी सँभालने के लिए मुझे कोई और रास्ता नज़र नहीं आया, तुम जानते हो अक्षय कभी वहाँ जाने के लिए तैयार नहीं होगा’

‘मैं जानता हूँ अंकल। बल्कि मैं तो खुद आपसे कोलकाता वाली कंपनी के बारे में बात करने वाला था’

‘तुम्हें वहाँ हमेशा रुकने की जरुरत नहीं है फ्रांसिस, तुम चाहो तो यहाँ बैठकर ही सब हैंडल कर सकते हो। जब भी जरूरत लगे एक बार जाकर देख लिया और फिर वापिस बॉम्बे’ अंकल ने कहा।

‘नहीं अंकल। अगर कंपनी को एक मुकाम तक पहुँचाना है तो मुझे वहीं रहकर काम करना होगा’ मैंने साफ़ किया।

‘तुम बिलकुल अपने डैड पर गये हो फ्रांसिस। May god bless you’ इतना कहकर अंकल सोने के लिए चले गए।

करीब एक हफ्ते बाद वहाँ बोर्ड मेंबर्स की मीटिंग थी। और अंकल चाहते थे कि उनकी जगह मैं उस मीटिंग का नेतृत्व करूँ। मीटिंग के दो दिन पहले मैंने कोलकाता जाना तय किया। मैंने अपना सारा जरुरी सामान एक बैग में डाला और कोलकाता के लिए रवाना हो गया।

वहाँ पहुँचते ही मैं सबसे पहले अपने घर गया। अंकल हालाँकि मेरे लिए फ्लैट बुक कर चुके थे पर मैंने अपने घर में रुकना तय किया। दो दिन साफ़-सफाई करने के बाद घर रहने लायक स्थिति में था। अगले दिन मीटिंग में मैंने बोर्ड मेंबर्स के साथ कंपनी की नयी पॉलिसीस और बाकी मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की।

मैंने अपनी मेहनत और अंकल की फाइनेंसियल मदद से एक साल के अंदर कंपनी का मुनाफा चार गुना बढ़ा दिया। बहुत दिनों बाद मैं अंकल से मिलने बॉम्बे गया हुआ था। वहाँ से जैसे ही वापिस लौटा तो पता चला कि कंपनी का हेडक्वाटर जिस जमीन पर बनने वाला था उस जामीन को उसके मालिक ने बेचने से इंकार कर दिया। 

‘ऐसे कैसे बीच में ही डील कैंसिल कर दी’ मैंने अपने मैनेजर को डाँटते हुए कहा।

‘सर मिस्टर जोशी बात करने के लिए तैयार ही नहीं है’ उसने सफाई दी।

‘जोशी जैसे लोगों को ठीक करना मुझे अच्छे से आता है। एक काम करो आज ही उन्हें कंपनी की तरफ से मेरे घर डिनर पर इनवाइट करो। मैं वहीँ उनसे बात करूँगा’

रात करीब 9 बजते ही जोशी मेरे घर पहुँचा। डिनर के सारे अरेंजमेंट्स पहले से ही हो चुके थे। खाना खाते-खाते मैंने बात करना शुरू किया–

‘मिस्टर जोशी आपने जमीन वाली डील बीच में ही कैंसिल कर दी’

‘मैंने सोचा शायद यहाँ सिर्फ डिनर के लिए मुझे बुलाया गया है’

‘कितनी कीमत है आपकी जमीन की’ मैंने गंभीर होकर कहा।

‘एक करोड़ भी देंगे तब भी नहीं बेचूँगा’ 

‘दस करोड़ में तो बेचेंगे ना मिस्टर जोशी’ 

मेरे इतना कहते ही जोशी पसीना-पसीना हो गया। आखिरकार उसने यह कहते हुए जमीन के पेपर्स पर साइन कर ही दिया कि शायद हमारी कंपनी को इस जमीन की कुछ ज्यादा ही जरुरत है। डिनर करने के बाद हमने ड्रिंक्स ली और कुछ देर तक बातें करते रहे।

‘अच्छा अब मैं चलता हूँ। मेरा मैनेजर आकर आपसे कैश कलेक्ट कर लेगा’ जोशी ने लड़खड़ाते हुए कहा। 

‘मुझे नहीं लगता आप ड्राइव करने की हालत में हैं मिस्टर जोशी, चलिए मैं आपको घर छोड़ देता हूँ’ मैंने कहा। 

‘No no I’m fine’ 

‘जिद मत कीजिये मिस्टर जोशी। इसी बहाने रास्ते में हम कुछ जुरूरी बातें भी कर लेंगे’ उनके हाँ करते ही मैंने गेराज से अपनी कार निकाली और दोनों उनके घर की तरफ निकल गया।

करीब 2-3 किलोमीटर ड्राइव करने के बाद मैंने सिगरेट खरीदने के लिए गाड़ी रोकी। 

‘आप यहीं रुकिए, मैं पास वाली दुकान से सिगरेट लेकर आता हूँ’ इतना कहकर मैं सिगेरट लेने निकल गया। वापिस आया तो जोशी कार के आस-पास टहल रहा था। मैंने एक सिगरेट जलाकर उसे ऑफर की। 

‘आपकी गैरमौजूदगी में जो कुछ भी हुआ उसके लिए माफ़ी चाहता हूँ। आगे से आपको जमीन को लेकर कोई परेशानी नहीं आएगी’ जोशी ने कहा।

‘उसकी नौबत ही नहीं आएगी मिस्टर जोशी’ इतना कहते ही मैंने कार की पिछली सीट में छिपी रॉड निकाली और उसके सिर पर दे मारी। 

देखते ही देखते वह लहूलुहान हो गया मैंने एक बड़ा पत्थर कार के सामने लाकर रख दिया और कार को पीछे ले जाकर पूरी रफ़्तार से उस पत्थर में टक्कर मार दी। उसकी साँसे अभी भी चल रही थीं। 

‘अगर तुमने 12 साल पहले ही यह शहर छोड़ दिया होता तो शायद तुम जिन्दा होते’ मैंने उसका सिर पास पड़े पत्थर से मार दिया और रॉड नीचे खाई में फ़ेंक दी। हादसे को पूरी तरह एक कार एक्सीडेंट में तब्दील करने के लिए मैंने खुद को थोड़ी चोट पहुंचाई और वहीं लेट गया। 

सुबह मेरी आँख खुली तो मैं हॉस्पिटल में था। पुलिस मेरा बयान लेने के लिए पहले से ही वहाँ मौजूद थी। मैंने उन्हें एक्सीडेंट की एक झूठी कहानी सुना दी। जोशी का सिर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहीं भी रॉड के कोई निशान नहीं मिले। जमीन के कागज़ात पर उसके दस्तखत से यह बात भी सिद्ध हो गयी कि हमारे बीच किसी भी तरह की कोई अनबन नहीं थी। यह महज़ एक हादसा ही था। 

उसके मरने के बाद मैंने पूरा पैसा उसकी फैमिली तक पहुँचा दिया। हेडक्वाटर का काम भी शुरू हो चुका था। 
सब कुछ ठीक चल रहा था। तभी अचानक एक सुबह सरथ अंकल का फ़ोन आया।

‘फ्रांसिस, तुमने नए हैडक्वाटर बनाने के लिए दस करोड़ रुपए की जमीन खरीदी’ अंकल गुस्से में थे।

‘हाँ अंकल, दरअसल जमीन शहर के बीचो-बीच है। इसलिए मुझे यह फायदे का सौदा लगा’ मैंने साफ़ किया।

‘पैसे पेड़ पर नहीं उगते फ्रांसिस, तुमने एक बार भी मुझसे सलाह लेना जरूरी नहीं समझा’

‘अगर बात मेरी होती तो फिर भी मैं रहने देता अंकल, पर उस जोशी ने डील कैंसिल करके कंपनी के एमडी की इज्जत को सरेआम उछालने की कोशिश की’ मैं भी गंभीर था।

‘और किसने बनाया तुम्हें एमडी फ्रांसिस? मैंने। अगर अपने आत्मसम्मान की इतनी ही चिंता थी तो बिना किसी सपोर्ट के कुछ करके दिखाते। भावनाओं में बहकर बिज़नेस नहीं चलता फ्रांसिस, अगर बचपन से लेकर आजतक मैंने तुम्हारी देखभाल नहीं की होती तो तुम दर-दर की ठोकरें खा रहे होते’

उनके इतना कहते ही मैंने बिना कुछ कहें फ़ोन काट दिया। शायद वह सही थे। शायद मेरा फैसला गलत था। उस दिन पहली बार समझ आया कि शायद किसी भी रिश्ते की कीमत पैसों से बहुत कम होती है। दादाजी सही कहा करते थे। इंसान का शक्तिशाली होना बहुत मायने रखता है। तारीक चाहे जो भी हो। शाम होने से पहले मैंने अपने सारे अधिकार बोर्ड मेंबर्स को सौंप दिए और कंपनी को हमेशा के लिए अलविद कह दिया। 

मैं वापिस घर जा रहा था। मेरे दिमाग में बार-बार सरथ अंकल की बातें  चल रही थीं। वह सरथ अंकल जिसे मैं पिता का दर्जा दे चुका था, आज उन्होंने भी मुझपर किये एहसान का एहसास दिल दिया। रास्ते में अचानक मैंने अपनी कार अपने पुराने स्कूल की तरफ मोड़ दी। वहीं जहाँ पहली बार मैं रहनुमा से मिला था। क्या पता रहनुमा आज भी मेरे इंतजार में वहीं बैठकर लकीरें खींच रहा हो। मुझे हमेशा इस बात का अफ़सोस रहा कि जाने से पहले एक बार भी मैं उससे मिलने नहीं आया।
 
वहाँ पहुँचा तो देखा कि वह जर्जर बिल्डिंग अब एक अच्छे घर में तब्दील हो चुकी थी। पहली मंजिल के किसी कमरे से हल्की रोशनी आ रही थी और कोई किसी से कुछ बात कर रहा था। कार लॉक करके मैंने सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया।

हरमन पढ़ने में मसगूल था कि तभी वेनिशा का कॉल आया–

‘हरमन आज घर जल्दी आ जाओ प्लीज, हमें मिस्टर शाह के यहाँ उनकी वाइफ की बर्थडे पार्टी में जाना है। उनका ड्राइवर इनविटेशन कार्ड भी छोड़कर गया’ वेनिशा ने कहा।

‘ओह हाँ, अच्छा ठीक है। तुम तैयार हो जाओ मैं बस 20 मिनट में पहुँच रहा हूँ’

‘ओके जल्दी आना, और हाँ रास्ते में जो गिफ्ट शॉप पड़ती है उससे उनके लिए कुछ अच्छा सा गिफ्ट भी लेते आना’

‘ठीक है वेनिशा, अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ Bye’

पार्टी की वजह से आज हरमन को जल्दी चर्च छोड़कर जाना पड़ा। उसने डायरी बंद की और फादर को सौंप दी। जाते वक्त फादर ने हरमन को बताया कि वह दो दिन किसी जरुरी काम से बाहर जा रहे हैं इसलिए चर्च बंद रहेगी। उसने हाँ में सिर हिलाया और वहाँ से निकल गया। 

घर पहुँचकर उसने कपड़े बदले और वेनिशा के साथ अपनी कार से अभिमान शाह द्वारा भिजवाए इनविटेशन कार्ड पर लिखे पते की तरफ निकल गया। वहाँ पहुँचकर देखा पार्टी लगभग शुरू हो चुकी थी। बाहर लॉन में सारे इंतजाम किये गए थे। उन दोनों को देखते ही अभिमान आगे बढ़ा और सबसे उनका परिचय करवाने लगा। थोड़ी देर बाद उसकी पत्नी अवंतिका वहाँ आयी। अभिमान उसे सीधा उन दोनों के पास ले आया।

‘अवंतिका ये है हरमन और यह उसकी वाइफ वेनिशा’ उसने मिलवाते हुए कहा।

‘Hii Avantika, You are looking too gorgeous’ वेनिशा ने गले लगते हुए कहा। 

हरमन ने हल्की मुस्कुराहट के साथ हाथ मिलाया और वेनिशा के साथ जाकर पार्टी में मौजूद बाकी लोगों के बीच खड़ा हो गया। केक काटने के बाद अवंतिका ने सबको डिनर के लिए इनवाइट किया। 

‘हरमन, प्रकाश अंकल भी पहले कोलकाता में ही रहते थे’ अभिमान ने टेबल की दूसरी ओर बैठे एक आदमी की तरफ इशारा करते हुए कहा। 

‘हेलो अंकल, क्या आप अभी भी वहाँ जाते हैं? या पूरी तरह यहीं शिफ्ट हो चुके हैं’ हरमन ने बातचीत शुरू की।

‘कलकत्ता (कोलकाता) छोड़ें तो ज़माना हो गया बेटा। उस वक्त हालात ही इतने ख़राब थे कि छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। एक तो हमारे खुद के रहने का ही ठिकाना नहीं था ऊपर से लिबरेशन वॉर के बाद जब बड़ी मात्रा में रिफ्यूजी आने लगे तो हमने शहर छोड़ना ही ठीक समझा’ अंकल ने उदास होते हुए कहा।

‘सबकी अपनी-अपनी मजबूरियाँ थी अंकल’ हरमन ने कहा।

‘हाँ पर तुम्हें नहीं लगता उन्हें वापिस उनके देश लौट जाना चाहिए था। उन्होंने हमारे देश आकार हमारी ही जमीन पर कब्ज़ा किया, यहाँ तक की हमारे कुछ लोगों के मुँह से दाना-पानी तक छीन लिया’ अभिमान थोड़ा गंभीर था।

‘कभी-कभी सिक्के के दोनों पहलुओं को देखने की जरुरत होती है मिस्टर शाह। ऐसा नहीं है कि उन्होंने कोशिश नहीं की। उनमें से कई लोग लौटे भी और जो नहीं गए हमें जरूरत थी उन्हें अपनाने की’ हरमन ने पानी का गिलास अभिमान की तरफ बढ़ाया। 

‘Thanks’ अभिमान ने कहा।

थोड़ी देर तक बातचीत का सिलसिला यूँ ही चलता रहा। रात के करीब 2 बज रहे थे। हरमन वेनिशा को लेकर अवंतिका के पास पहुँचा।

‘अच्छा अब हम चलते हैं। रात काफी हो चुकी है और वेनिशा को भी नींद आ रही है’ हरमन ने पार्टी के लिए शुक्रिया अदा किया।

‘जी जरूर। आप दोनों से मिलकर अच्छा लगा। और हाँ, आप दोनों को फिर से जरूर आना है। अभिमान ने बताया आप सिर्फ यहाँ कुछ दिनों के लिए आये हैं’ अवंतिका ने कहा।

‘बिल्कुल, शायद अब अभिमान के जन्मदिन पर। हरमन हँसा’ वैसे कब होता है उनका जन्मदिन?’

‘उसके लिए तो आपको एक साल और रुकना पड़ेगा। अभी पिछले महीने ही निकला है’ अवंतिका ने हँसते हुए कहा।

बातचीत खत्म होते ही हरमन वेनिशा को लेकर निकल गया।
घर पहुँचने के बाद दोनों कुछ देर तक पार्टी और अभिमान के बारे में बातें करते रहे और बात करते-करते दोनों की आँख लग गयी। 

Present Day–
हरमन की बात मानकर वेनिशा देहरादून अपने अंकल के घर जाने के लिए तैयार हो गयी। दूसरे दिन सुबह होते ही उसने अपना जरुरी सामान पैक किया और अंकल को फ़ोन करके उसके वहाँ आने की खबर दे दी। 

‘अभी भी टाइम है, तुम चाहो तो मैं तुम्हें छोड़ने देहरादून तक साथ चल सकता हूँ’ हरमन ने बैग उठाते हुए कहा।
 
‘नहीं हरमन, तुम्हें परेशान होने की जरुरत नहीं है। मैं चली जाऊँगी। तुम बस अपना ध्यान रखना’ वेनिशा ने कहा।

हरमन वेनिशा को स्टेशन तक छोड़ने गया। कोहरे की वजह से ट्रेन थोड़ी लेट थी। ट्रेन के आते ही हरमन ने टिकट वेनिशा को दिया और उसे गले लगाते हुए जल्द वापिस बुलाने का वादा किया। 

रात होते ही हरमन ने निकोलस से जुड़ी जो भी इनफार्मेशन लन्दन से हासिल की थी उसे एक डायरी में लिखा और अपने सामान के साथ पैक कर दिया।
 
हरमन ने अगले दिन का ही यू.एस का टिकट बुक कर रखा था।

दूसरे दिन दोपहर की फ्लाइट से वह लॉस वेगास के लिए निकल गया। वहाँ पहुँचकर उसकी मुलाकात उसके दोस्त अहमद से हुई। अहमद कश्मीर में उसके साथ कॉलेज में था। उसके बाद वह नौकरी करने यू.एस आ गया और तब से वहीं रह रहा था। 

‘See who I am with, The great Indian Magician’ अहमद ने शरारत भरे अंदाज में उसका स्वागत किया। 

‘तू नहीं सुधरेगा’ हरमन ने उसे गले लगाया।

‘सुधरकर करूँगा भी क्या। तू बता, ऐसे अचानक। कुछ दिन पहले बता देता तो मैं कंपनी में छुट्टी के लिए एप्लाई कर देता’

‘उसकी जरुरत नहीं है अहमद, वैसे भी मैं कुछ जरुरी काम से आया हूँ। तेरा ज्यादा वक्त नहीं लूँगा। बस एक आदमी है जिस तक पहुँचने में मुझे तेरी मदद चाहिए। सुनने में आया है कि उसे अंतिम बार यहीं लॉस वेगास में देखा गया’ हरमन ने अहमद के कंधे पर हाथ रखा।

‘इतने बड़े शहर में उसे ढूँढना आसान तो नहीं होगा, फिर भी हम कोशिश कर सकते हैं। तुम्हारे पास उसकी कोई फोटो तो होगी ना?’

‘यही तो प्रॉब्लम है अहमद, उसके नाम के अलावा उसके होने का मेरे पास कोई सबूत नहीं है’

‘ये तो बहुत बड़ी समस्या है। पर तुम चिंता मत करो, मेरा एक NRI फ्रेंड है जो शायद तुम्हारी मदद कर सकता है। यहीं डाउनटाउन में एक अमेरिकन का कसीनो संभालता है’

‘आज शाम को मिल सकता है’ हरमन ने सवाल किया।

‘हाँ, क्यों नहीं। तुम आराम करो शाम होते ही मैं तुम्हें उसके पास लेकर चलूँगा’ अहमद इतना कहकर वहाँ से चला गया।

अहमद के जाते ही हरमन थोड़ा आराम करने के लिए लेट गया। 

शाम करीब 7 बजे अहमद हरमन को लेकर डाउनटाउन पहुँचा। रोशनी से चकाचौंध कसीनो में सैकड़ों लोग आज फिर अपनी किस्मत आजमाने आये हुए थे। अंदर पहुँचते ही अहमद का दोस्त लेनिन उसकी तरफ बढ़ा। अहमद पहले से ही उनके आने की खबर उसे दे चुका था। अहमद ने हरमन को लेनिन से मिलवाया और फिर उन दोनों को अकेला छोड़कर किसी अर्जेंट कॉल के बहाने वहाँ से निकल गया।

‘अहमद ने बताया। तुम किसी आदमी के पीछे हो’ लेनिन ने कहा।

‘हाँ, सुना है वह यहीं वेगास में ही है’ हरमन ने वाइन का गिलास उठाते हुए जवाब दिया।

‘नाम?’

‘निकोलस’

निकोलस का नाम सुनते ही लेनिन पसीना-पसीना हो गया। उसने काँपते हुए हाथों से अपना गिलास वापिस टेबल पर रखा और इधर-उधर देखते हुए बोला–

‘तुम जानते भी हो निकोलस को? मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता’ उसने उठते हुए कहा।

‘मैं तुम्हें एक अच्छी कीमत दे सकता हूँ लेनिन। मुझे सिर्फ उसका पता चाहिए, उसके बाद मैं खुद उससे निपट लूँगा। तुम निश्चिन्त रहो, किसी को इस बात की भनक भी नहीं होगी’ हरमन ने उसे दिलासा दिया।

‘तुम गलत आदमी से टक्कर ले रहे हो। अगर उसे जरा सा भी शक हुआ तो हमारा गला काट कर अपने घर में लटका देगा’ लेनिन घबराया हुआ था।

‘तुम उसकी चिंता मत करो। हमें कुछ नहीं होगा। तुम बस एक बार मुझे उसका पता लाकर दे दो’

‘ठीक है। मैं आज रात उसके बारे में पता करके तुम्हें कल बताता हूँ। यहाँ पास में ही एक ब्रिज है, कल आठ बजते ही वहाँ पहुँच जाना। हमारा यहाँ मिलना सेफ नहीं है’

‘ठीक है। कल मिलते हैं’ हरमन ने बाहर आकर अहमद को फ़ोन को किया। अहमद पार्किंग से कार लेकर आया और उसे उसके होटल छोड़कर कल मिलने का कहकर निकल गया। 

हरमन निकोलस से अब बस सिर्फ एक दिन दूर था।

9 days Ago–
दो दिन बीतने के बाद जब मार्शन ऑलिवर वापिस लौटा तो हरमन ने फिर से चर्च जाना शुरू कर दिया। 

​The Magician page no. 43-47

ऊपर पहुँचकर मैंने देखा एक आदमी हाथ में शराब का गिलास लिए खुद से ही बातें करने में करने में लगा हुआ था। यह मास्टर लॉरेन से मेरी पहली मुलाकात थी। लंबा कद, भूरे बाल, आँखों में चमक। तन पर काला कोट-पैंट पहने हुए, जैसे कहीं जाने की फिराक में हों।

मुझे देखते ही उन्होंने बल्ब की रोशनी में मेरा चेहरा ठीक से देखने के लिए अपनी दोनों आँखें दाहिने हाथ की हथेली से ढकीं और फिर बस इतना कहकर शांत हो गए–

‘कौन? अगर कोई अपना उधार वापिस माँगने आया है तो मेरे पास फ़िलहाल तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है। सिवाय इस खाली बोतल के’

‘मेरा नाम फ्रांसिस है’ मैंने चुप्पी तोड़ी।

‘क्यों आये हो यहाँ, क्या मुझे तुम्हारा भी कुछ उधार लौटना है’

‘नहीं, मैं तो बस अपने एक दोस्त को ढूंढ रहा था, यहीं नीचे रहता है’

‘यहाँ कोई नहीं रहता। सिवाय मेरे और उस बोतल के। तुम शायद गलत जगह आ गए हो’ आखिरकार वह अपनी कुर्सी से उठे। 

‘शायद आप सही कह रहे हैं। अच्छा मैं चलता हूँ। तकलीफ़ देने के लिए माफी’ मैं वापिस जाने के लिए मुड़ा।

‘थोड़ी देर यहीं रुको। बिजली जाने वाली है। जब वापिस आ जाए तो चले जाना’ उन्होंने रुकने का आग्रह किया।

मैं आगे बढ़ा और उनके पास जाकर बैठ गया। उन्होंने बाजू में रखे गिलास में शराब डालकर मुझे उठाने के लिए इशारा किया। मैंने मना करना चाहा पर वो नहीं माने। शराब पीने के बाद हम कुछ देर तक बातें करते रहे। नशे की हालत में मैं सरथ अंकल को गालियां देता रहा। जब मेरी नज़र दीवार पर लगे कैलेंडर पर पड़ी तो मैंने देखा कि उसपर सन् 1997 का कैलेंडर टंगा हुआ था। उस समय से ठीक दो साल पीछे। जब मैंने मास्टर लॉरेन से यह सवाल किया तो वह चुपचाप कमरे से लगी बालकनी में जा पहुँचे। बिजली जा चुकी थी इसलिए मैं भी वहाँ से उठकर बालकनी में पहुँचा। मैंने जब दोबारा पूछा तो उन्होंने बोलना शुरू किया–

‘वह साल मैं कभी नहीं भूल सकता। मैं और डेविड मिलकर बॉम्बे में हमारा खुद का थिएटर खोलने वाले थे। वह कोलकाता में हमारा आखरी मैजिक शो था। हम दोनों बहुत खुश थे। उस वक्त डेविड मात्र 28 साल का था। मुझसे करीब एक साल छोटा। डेविड मेरा असिस्टेन्ट हुआ करता था। हम दोनों ने कोलकाता से अपने जादुई सफर की शुरुवात की। डेविड और मैं हमेशा से हमारा खुद का थिएटर चाहते थे। उस दिन मैं स्टेज पर था और डेविड हर बार की तरह बॉक्स में बंद रहकर मेरी मदद करने वाला था। पर उस दिन स्टेज सेट करने वाले ने बहुत बड़ी गलती कर दी और डेविड जिस बॉक्स में था वह जाकर नीचे की ओर बेसमेंट की ओर खुल गया। नीचे गिरने से डेविड की मौत….मैंने उसे नहीं मारा। मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता था’

मास्टर लॉरेन की आँखों में आँसू थे। मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा। उन्होंने दोबारा बोलना शुरू किया–

‘लोगों ने उस हादसे को मेरी भूल का नाम देकर शो में आना बंद कर दिया। मुझपर बहुत ज्यादा क़र्ज़ था। मैंने शो करना बंद कर दिया। डेविड और मेरे मास्क भी जला दिए। मैंने सोचा शायद उस मास्क के अलावा मेरी कोई पहचान नहीं रहेगी। पर एक अचानक पुलिस मेरे घर आ पहुँची। शो के ही किसी वर्कर ने मुझे एक्सपोज़ कर दिया था। मुझे मेरे ही दोस्त के खून के इलज़ाम में गिरफ्तार किया गया। एक साल तक मुझे लगातार टॉर्चर किया गया। फिर जब उन्हें मेरे खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला तो पिछले साल मुझे रिहा कर दिया गया। और आज तक मैं इस दर्द से उभर नहीं पाया। यहीं वजह है कि तब से इस घर में कोई चीज नहीं बदली। दो साल से यह कैलेंडर उसी तारीक पर अटका हुआ है जिस तारीक से सब कुछ बदलने वाला था’

मास्टर लॉरेन और उनके दोस्त डेविड के साथ जो कुछ भी हुआ उसे मुझसे बेहतर कौन समझ सकता था। बिजली आते ही मैं वापिस घर तो आ गया पर मास्टर लॉरेन का दर्द अभी भी मेरे जेहन में घूम रहा था। अगले दिन सुबह होने से पहले मैंने अपना जरुरी सामान पैक किया और अपने घर को आग के हवाले करके मैं सीधा मास्टर लॉरेन के पास पहुँच गया। 

The magician page no. 48-53

‘आओ फ्रांसिस, मैं तुम्हारा ही इन्तजार कर रहा था’ मास्टर लॉरेन ने मुझे देखते ही कहा। 

‘पर आपको कैसे पता मैं आने वाला हूँ?’ मैं आश्चर्यचकित था।

‘लोग मुझे मास्टर लॉरेन यूँ ही नहीं कहते थे फ्रांसिस’ उन्होंने कहा।

‘तो क्या एक बार फिर वही पुराना मास्टर लॉरेन लोगों के बीच नहीं लौट सकता’ मैंने दबी आवाज़ में कहा।

‘यह संभव नहीं है’ मास्टर लॉरेन गुस्से में थे।
‘पर क्यों?’

‘क्योंकि अब चीजें बदल चुकीं हैं। लोग बदल चुके हैं। और जो लोग मुझे पसंद करते थे उनके लिए तो मैं कब का मर चुका हूँ। लॉरेन अब पुराना मास्टर लॉरेन बनकर वापिस नहीं लौट सकता’

‘फ्रांसिस बनकर तो लौट सकता है ना’ मैंने कहा।

मेरे इतना कहते ही वह एकदम शांत होकर मुझे देखने लगे। 

‘जरा सोचिए मास्टर लॉरेन। आपके पास अद्भुत शक्तियाँ हैं और मेरे पास अपार दौलत। हम दोनों मिलकर पूरे कोलकाता को अपनी कला का कायल कर देंगे। और किसी को जरा सा भी शक नहीं होगा कि आप फ्रांसिस नहीं लॉरेन हैं। हम फिर से आपके वही पुराने मुखौटे वाली तकनीक इस्तेमाल करेंगे। जरा सोचिए मास्टर लॉरेन आप फिर से जादू को नए मुकाम तक पहुँचा सकते हैं’

‘पर यह होगा कैसे?’ उन्होंने सवाल किया।

‘बस आपको मुझे डेविड की जगह देनी होगी। इस बार मैं आपका असिस्टेंट। बस आप मुझे कुछ मामूली सी मैजिक ट्रिक्स और लोगों को आकर्षित करने की कला सिखा दीजिए। बाकी इंतजाम मैं कर लूँगा’

मास्टर लॉरेन आखिरकार मान गए। उन्होंने मुझे एक अच्छे जादूगर बनने की तमाम कलाएं सिखायीं। मैंने मेरे पास बचे पैसों से शो करने के लिए एक अच्छी जगह का इंतजाम किया। और देखते ही देखते एक साल के अंदर सन् 2001 में हमने “फ्रांसिस: द मैजिशियन” के नाम से अपने शो की शुरुवात की। कोलकाता में मेरा नाम तेजी से फैलने लगा। अगले एक साल तक हमने कोलकाता में कईं शो किये। मैंने शो से जितना भी पैसा कमाया उसे सरथ अंकल जिनके लिए मैं मर चुका था उनके बिज़नेस पार्टनर्स को वह पैसा देकर उन्हीं के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू किया और देखते ही देखते उनके पार्टनर्स ने उनकी सभी बड़ी कम्पनीज पर कब्ज़ा कर लिया। शायद दादाजी सही कहा करते थे। इंसान का शक्तिशाली होना आवश्यक है। तरीका चाहे जो भी हो। 
कुछ दिनों तक मैंने मास्टर लॉरेन के असिस्टेन्ट के रूप में स्टेज संभाला। फिर अपनी बिगड़ती तबियत की वज़ह से मास्टर लॉरेन ने स्टेज पर आना कम कर दिया और उनकी जगह मैं सँभालने लगा। हम दोनों बदल-बदलकर स्टेज संभाला करते थे और इस बात की किसी को भनक भी नहीं थी। सब कुछ अच्छा चल रहा था। पर कौन जानता था कि आगे क्या होने वाला है। 

The magician page no. 53-57

एक दिन मैं अपना शो खत्म करके ड्रिंक्स लेने के लिए हमारे थिएटर के पास वाले रेस्टोरेंट में गया। वहाँ पहुँचा तो अंदर पार्टी चल रही थी। मैंने अपना मास्क निकालकर गले में लटकाया और उनकी पार्टी की थीम के अनुसार जो मास्क वहाँ पड़े थे उन में से एक पहनकर मैं अंदर जा पहुँचा। ड्रिंक्स खरीदकर मैं जैसे ही वहाँ बैठा, किसी ने अचानक पीछे से मेरा नाम पुकारा–

‘जादूगर फ्रांसिस’

मैंने पलटर देखा तो मुझसे करीब 3-4 साल बड़ा एक लड़का बिना किसी मास्क के मेरे पीछे खड़ा था। 

‘क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ’ उसने पूछा।

‘तुमने मुझे पहचाना कैसे? कौन हो तुम?’

‘सर मेरा नाम जैक है। मैं भी आपकी तरह एक मैजिशियन हूँ’ उसने अपना कार्ड निकालकर मुझे थमा दिया।

‘हाँ, लेकिन मेरा पीछा क्यों कर रहे हो?’

‘सर मैं कुछ दिनों से लगातार आपका हर शो देख रहा हूँ। आपका परफॉर्म करने का तरीका लाज़वाब है। मैं बस आपसे इतना कहना चाहता हूँ कि आप प्लीज मुझे कुछ दिनों के लिए बतौर असिस्टेन्ट अपने साथ स्टेज शेयर करने दीजिए’ उसने अनुरोध किया।

‘यह जानते हुए भी कि जब से तुम आये हो मेरे शो को कितना लॉस हो रहा है’ मैंने आँखें चढ़ाते हुए कहा।

‘सर मैं वादा करता हूँ। मैं एक महीने के अंदर कोलकाता छोड़कर चला जाऊँगा। आप बस मुझे कुछ दिनों के लिए आपके साथ काम करने दीजिए’ 

उसकी डील अच्छी थी। पर मैंने एकदम से हाँ बोलना ठीक नहीं समझा। मैंने उसे कुछ वक्त और मेरे शो में आने के लिए कहा। जब मैंने मास्टर लॉरेन से इस बारे में बात की तो उन्होंने इसके लिए साफ़ इंकार कर दिया। उनका मानना था कि एक मैजिशियन की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में किसी भी प्रकार की दखल अंदाज़ी नुकसानदायक हो सकती है। पर मैं उसे साथ लेने का पूरा मन बना चुका था। कुछ दिनों की कोशिश के बाद आख़िरकार मास्टर लॉरेन मान गए। एक दिन शो खत्म होने के बाद मैं जैक से मिला और उसे अगले दिन से आने के लिए कहा और साथ ही साथ उसे यह भी समझा दिया कि काम के वक्त वह ज्यादा बात ना करे। स्टेज पर अक्सर मैं और मास्टर लॉरेन अपनी पहचान छुपाने के लिए किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे। 

उस दिन मास्टर लॉरेन स्टेज पर जाने वाले थे। उन्होंने जैक को नया मास्क देकर स्टेज पर जाने के लिए तैयार किया। 

‘लेडीज एंड जेंटलमैन, अब मैं आपके सामने प्रस्तुत करता हूँ जादूनगरी की सबसे पुरानी ट्रिक जिसका नाम है “द नाईट केज”।

इस ट्रिक में किसी एक इंसान को पिंजरे के अंदर बंद करके उसे हर तरफ से बाँध दिया जाता था। फिर पिंजरे को हवा में लटकाकर उसकी रोशनी लगातार कम की जाती थी और डरावनी आवाज़ें चलायीं जाती थी। फिर कुछ देर बाद जैसे ही लाइट ऑन होती थी तो उस इंसान की जगह एक चमगादड़ ले लिया करती थी। 

उस दिन यही ट्रिक होने वाली थी। मास्टर लॉरेन ने जैक को पिंजरे के अंदर बंद करके रोशनी कम करना शुरू कर दिया। डरावनी आवाज़ें चलायीं गईं। और फिर कुछ देर बाद जैसे ही लाइट ऑन की तो देखा जैक मर चुका था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक आया। क्योंकि हम पहले से ही एग्रीमेंट साइन करवा लेते थे इसलिए जैक की मौत की जिम्मेदारी हमारे ऊपर नहीं थी। यह महज एक हादसा था। लेकिन ऐसे हादसे अक्सर नुकसानदायी होते हैं। मास्टर लॉरेन ने ट्रिक करते वक्त पिंजरा चेक किया होता तो उन्हें मालूम होता कि पिंजरे का दरवाजा, जहाँ से एस्केप करना होता है वही जाम था।
 
जिस तरह लोगो ने मास्टर लॉरेन को नकार दिया था आज एक बार फिर उन्हीं की वजह से फ्रांसिस यानि मुझे नकार दिया गया। पहले लोगो ने आना कम किया और फिर धीरे-धीरे बिलकुल बंद कर दिया।

और इस तरह जादूगर फ्रांसिस का नाम हमेशा-हमेशा के लिए कहीं गुम हो गया।

The magician– The final page

जैक की मौत के बाद मैंने घर से बाहर तक निकलना बंद कर दिया। मैं अंदर ही अंदर घुट रहा हूँ। इससे पहले कोई और दुर्घटना हो मैं एक ऐसा राज बताने जा रहा हूँ जो जादूनगरी की हर सीमा तोड़ देगा। एक ऐसा सच जो आज के पहले या तो सिर्फ किताबों में लिखा गया या जिसे सिर्फ कहानियों में सुना गया। 

मेरे डैड ने मरने से पहले मुझे एक किताब दी थी। जिसमें सात चक्रों को तोड़ने का रहस्य है। अगर उन साथ चक्रों को सही क्रम में रखा जाए तो कोई भी इंसान उससे निकलने वाली ऊर्जा से इतना शक्तिशाली हो सकता है जिसकी कल्पना करना मुश्किल है। वह एक ही समय कहीं भी हो सकता है और कहीं भी नहीं। जब मैं मास्टर लॉरेन से मिला तो मुझे पता चला कि वह और उनका ऐसस्टेन्ट डेविड उस सही क्रम की तलाश में थे। डेविड के जाने के बाद मास्टर लॉरेन ने अपनी तलाश बीच में ही अधूरी छोड़ दी थी। पर मुझसे मिलने के बाद मास्टर लॉरेन ने और मैंने मिलकर फिर से उस सही क्रम की खोज शुरू की। और इस काम को डैड द्वारा दी गयी किताब ने और भी आसान कर दिया। मैं चाहता हूँ की यह किताब इसके सही हक़दार को मिले। जो इसका गलत इस्तेमाल करने की बजाय इसे इंसानो की भलाई के लिए इस्तेमाल करे। 

अगर तुम यह डायरी पढ़ रहे हो तो इसका मतलब है मार्शन को तुम पर विश्वास है। जैसे मुझसे मार्शन पर है। अगर तुम सच में उस किताब के हक़दार हो तो तुम्हें वो सात चक्र हासिल करके यह सिद्ध करना होगा। यहाँ नीचे मैं कुछ नाम लिख रहा हूँ जो तुम्हें उन चक्रों पहुँचा सकते हैं। यह सातों चक्र सिर्फ एक इंसान के कब्जे में हैं। जिसका नाम निकोलस है। मुझे पता चला है कि वह सही क्रम तोड़ने के बहुत करीब है। इससे पहले की वह उसे तोड़ने में कामयाब हो तुम्हें उन चक्रों को हासिल करना होगा। जब तक यह डायरी तुम्हें मिलेगी मैं इस दुनिया से जा चुका होऊँगा। तुम जो कोई भी हो, तुम्हें उन चक्रों को इस्तेमाल होने से पहले ढूँढना होगा।

―फ्रांसिस: द मैजिशियन…

‘क्या हुआ था फादर?’ हरमन ने डायरी बंद की।

‘उस रविवार की शाम में अपने घर वापिस जा रहा था। तभी फ्रांसिस ने मुझे फ़ोन करके जल्दी उसके घर आने को कहा। उस दिन वह काफी घबराया हुआ था, बैचैन था। उसने मुझे यह डायरी दी और कहा कि अगर कोई सच में इसके लायक है तो मैं उसे यह सौंप दूँ। और हाँ, साथ ही साथ एक और डायरी भी दी जो बेहद खास थी। जिसे पाने के लिए किसी के पास उन सात चक्रों का होना आवश्यक है जिसका जिक्र फ्रांसिस ने किया है। मैं दोनों डायरी लेकर वापिस लौट ही रहा था कि तभी उसके घर में बहुत तेज धमाका हुआ और मेरी आँखों के सामने सब जलकर खाक हो गया। पुलिस को फ्रांसिस का पूरा शरीर भी नहीं मिला’

‘और मास्टर लॉरेन?’ हरमन ने मार्शन के कंधे पर हाथ रखा।
‘जैक की मौत के बाद उन्हें कभी नहीं देखा गया। आखरी बार जब वो फ्रांसिस से मिले तो उन्होंने बस इतना कहा कि शायद अब वह कभी वापिस नहीं आएंगे। उनका साथ यहीं तक का था’

‘मैं चलता हूँ फादर। अपना ध्यान रखना’

‘वापिस आओगे ना हरमन?’ हरमन के मुड़ते ही मार्शन ने कहा।

‘जरूर फादर, बहुत जल्द’ 

‘May god bless you’

‘Thank you father’

Present day–

अगले दिन शाम होते ही हरमन लेनिन के बताए पते पर पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर लेनिन ने उसे बताया कि–

‘आज रात 11 बजे निकोलस यूरोप के बहुत बड़े जादूगर अलास्तविन से मिलकर कोई जरुरी डील करने वाला है। ये वहाँ का एड्रेस है’

‘गुड जॉब, हम आज रात ही उसपर हमला करेंगे। तुम तैयार हो ना?’ हरमन ने कहा।

‘इतना आसान नहीं होगा। अलास्तविन की सिक्योरिटी खुद रसियन माफिया संभालती है। वहाँ जाकर निकोलस को पकड़ना मतलब खुद को मौत के हवाले करना’ लेनिन चिंतित था।

‘तुम उसकी चिंता मत करो। तुम बस अपने आदमी तैयार करो। तुम्हें जो भी गन्स चाहिए खरीद लो। आज रात मुझे हर हाल में निकोलस चाहिए’ हरमन का इरादा साफ़ था।

‘ठीक है। तुम ठीक 10 बजे मुझे यहीं मिलो। मैं काली रंग की कार में इसी ब्रिज के नीचे तुम्हारा इन्तजार करूँगा’ लेनिन ने जाते हुए कहा।

हरमन वहाँ से सीधा होटल पहुँचा और अपना सामान पैक करके सूटकेस में से एक जैकेट निकाली और उसे पहनकर वापिस उसी ब्रिज के लिए निकल गया। वहाँ पहुँचते ही हरमन लेनिन के साथ कार में बैठा और उसके आदमियों के साथ उसके बताये पते की तरफ निकल गया। रास्ते में लेनिन ने हरमन को एक गन दी और उसे उसके आदमियों के पीछे रहने के लिए कहा। वहाँ पहुँचकर देखा तो वह एक सुनसान इलाका था जो कब्रिस्तान से घिरा हुआ था। मीटिंग शुरू होने में अभी वक्त था। कुछ देर के इंतजार के बाद वहाँ हलचल बढ़ने लगीं। पहले दो बड़ी गाड़ियाँ रुकीं जिनमें अलास्तविन और रसियन माफिया थी। और थोड़ी ही देर बाद तीसरी गाड़ी रुकी जिसमें निकोलस और उसके कुछ आदमी थे। 

‘मेरे तीन बोलने पे’

हरमन ने जैसे ही इशारा किया दोनों तरफ से अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गयी। लेनिन और रसियन माफिया के काफी लोग मारे गए। लेनिन के लगभग सारे आदमी खत्म हो चुके थे। यह देखकर हरमन ने बम से भरी जैकेट उतारी और उसे उनकी तरफ फ़ेंक दिया। कार में विस्फोट की वजह से अलास्तविन और उसके आदमी देखते ही देखते ढेर हो गये। निकोलस का एक पैर उसके शरीर से अलग हो चुका था। हरमन आगे बढ़ा और उसने निकोलस के पास पड़े ब्रीफ़केस को उठा लिया। 

‘फ्रांसिस?’

‘नहीं। हरमन’

‘हरमन, मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूँ’ निकोलस ने जमीन पर रेंगते हुए कहा।

‘और मैं तुम पर यकीन क्यों करूँ’ हरमन ने कहा।

‘एक मरता हुआ इंसान झूठ क्यों बोलेगा हरमन’ निकोलस हँसा।

‘बोलो, मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है’

‘अकेले में’ निकोलस ने कहा।

‘लेनिन’ हरमन चिल्लाया।

हरमन के बुलाने पर लेनिन जैसे ही पलटा हरमन ने उसे माथे के ठीक बीचों-बीच शूट कर दिया।

‘अब बोलो’….

3 days later–

हरमन यू.एस. से लौटकर सीधे गोवा अपने घर पहुँचा। घर पहुँचकर उसने जैसे ही दरवाजा खोला तो देखा घर सजा हुआ था। वह आगे बढ़ा और और इधर-उधर देखने लगा।

‘हैप्पी बर्थडे हरमन’ वेनिशा ने हरमन को पीछे से गले लगाते हुए कहा।

‘Thank you venisa…What a pleasant surprise!’ तुम्हें कैसे पता मैं आज ही आने वाला हूँ।

‘मैं तुम्हारा साया हूँ मिस्टर हरमन रॉय’ पता कैसे नहीं चलता। अच्छा बताओ आज शाम का क्या प्लान है?’

‘वेल, अभी तक तो मैंने कुछ नहीं सोचा था पर अब तुम आ ही गयी हो तो देखते हैं। फिलहाल मुझे कुछ जरुरी काम है तो तुम ये सामान संभाल कर रख दो, मैं यूँ गया और यूँ आया’

‘क्या हरमन, कम-से-कम अपने बर्थडे के दिन तो काम रहने दो’

‘बस आखरी बार वेनिशा। कल सुबह होते ही हम हमेशा के लिए वापिस कोलकाता चले जायेंगे, मैं वादा करता हूँ’

गेराज से एक पुरानी कार लेकर हरमन सीधे चर्च पहुँचता है। उसके दाएं हाथ में एक ब्रीफ़केस था और बाएं हाथ एक गन जो कि उसके जैकेट के नीचे छुपी हुई थी।  

‘गुड इवनिंग फादर’ हरमन ने मार्शन को आवाज़ दी।

‘गुड इवनिंग सन। अच्छा हुआ जल्दी आ गए, मैं बस जाने ही वाला था’ मार्शन ने हरमन की तरफ पलटते हुए कहा।

‘फादर मैंने सात चक्रों को हासिल कर लिया है। अब मुझे बस उस डायरी की जरूरत है जिसमें इनके सही क्रम का राज है। जो सिर्फ आप मुझे दे सकते हैं’ हरमन ने ख़ुशी जाहिर की।

‘जरूर हरमन। लेकिन मैं चाहता हूँ कि उससे पहले तुम आज के हमारे ख़ास मेहमान से मिलो’ मार्शन ने दूर बैठे किसी आदमी की तरफ इशारा किया।

‘इन्हें कौन नहीं जानता फादर। ये मिस्टर अभिमान शाह हैं। मैं इनसे पहले भी दो बार मिल चुका हूँ। बस आपसे यहाँ मिलने की उम्मीद नहीं थी मिस्टर शाह’

‘मुझे थी कहाँ उम्मीद थी मिस्टर हरमन रॉय। ऊप्स सॉरी। 
”मिस्टर जैक डी’क्रूज” 

‘ओह! तो आख़िरकार तुमने मुझे पहचान ही लिया। अब जब पहचान लिया है तो फिर यह भी जानते होगे मैं यहाँ क्यों आया हूँ। मार्शन। मुझे वो डायरी चाहिए अभी’ जैक चिल्लाया।

‘शांत रहो जैक। मार्शन को ख़ामोखां तंग करने की जरुरत नहीं है। इन चक्रों को पाने के लिए मैंने तुमसे ज्यादा इन्तजार किया है’

अगले ही पल मार्शन के इशारे करते ही कुछ आदमी वहाँ आकार जैक के हाथ से ब्रीफ़केस छीनने लगते हैं। जैक अपनी गन निकालता है पर उसमें बुलेट्स नहीं थी। 

‘मुझे हरमन का कातिल चाहिए फ्रांसिस। मुझे सिर्फ लॉरेन चाहिए। तुम ब्रीफ़केस और डायरी अपने पास रख सकते हो’ जैक उन आदमियों की गिरफ्त से छूटने की कोशिश करता है। 

‘कौन चाहिए तुम्हें? मास्टर लॉरेन, हा हा। हर कहानी वैसी नहीं होती जैक जैसी हमें दिखाई जाती है। कुछ कहानियाँ लोग अपनी जरुरत के हिसाब से भी रच देते हैं’ फ्रांसिस हँसा। 

‘क्या मतलब?’ जैक अचंभित था।

‘हरमन को मास्टर लॉरेन ने नहीं बल्कि मैंने मारा था। अंधेरे में जहर का इंजेक्शन देकर। जिसकी झूठी रिपोर्ट तैयार की थी मेरे दोस्त यानि डॉक्टर मार्शन ओलिवर ने। मास्टर लॉरेन तो कभी थे ही नहीं। जब मैं उनसे मिला तो वो बहुत बीमार थे। मैंने मेरे पास बचे पैसों से उनका इलाज़ करवाया। उनकी हालत में धीमे-धीमे सुधार होने लगा। उन्होंने मुझे एक असली जादूगर बनने में मदद की। और फिर मैंने कोलकाता में परफॉर्म करना शुरू कर दिया। सब कुछ सही चल रहा था, फिर तुम आए। जादूगर जैक बेवकूफ। तुमने हरमन को ढाल बनाकर मेरे शो में आना शुरू कर दिया। तुम रोज हरमन के आस-पास ही कहीं बैठते थे। पर तुम्हारा चेहरा मुझे ढंग से नज़र नहीं आता था। मैंने जानबूझकर ऐसे परफॉर्म करना शुरू कर दिया जैसे एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग लोग स्टेज पर हैं। एक ही ट्रिक को मैं अलग-अलग तरीके से करने लगा। क्योंकि मेरी सारी ट्रिक्स मास्टर लॉरेन की देन थीं इसलिए मैं बस इतना जानना चाह रहा था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मास्टर लॉरेन का कोई पुराना दुश्मन लौट आया हो। जब हरमन उस दिन मुझे रेस्टोरेंट में मिला तो मुझे लगा कि शायद तुम्हें इस बात पर विश्वास हो गया है कि स्टेज पर एक नहीं बल्कि दो लोग हैं। फिर एक दिन जब मैंने तुम्हारा पीछा किया तो पता चला कि जो मुझसे मिला वह जादूगर जैक है ही नहीं। वह तो तुम थे। उसका नाम तो हरमन था। सारा खेल समझ में आ गया। मैंने हरमन के बारे में मास्टर लॉरेन को कभी बताया ही नहीं। उस रात जब ‘द नाईट केज’ के लिए हरमन को पिंजरे में बंद किया गया तो मैंने अँधेरे का फायदा उठाकर उसे इंजेक्शन देकर उसका खेल वहीँ खत्म कर दिया। उसे मारने के बाद मुझे अपना शो बंद करना पड़ा। और तुम्हें शायद इस बात का इतना गहरा सदमा लगा की तुमने खुद ही अपना शो बंद कर दिया। कुछ दिन बाद मास्टर लॉरेन और मैंने मिलकर मेरे डैड की किताब में छुपे सही क्रम का तोड़ भी ढूंढ निकाला। उस रात मुझे लगा कि शायद अब मुझे मास्टर लॉरेन की जरुरत नहीं है और मैंने उन्हें मौत की नींद सुला दिया। मैं उनकी लाश को ठिकाने लगा ही रहा था कि मुझे तुम दिखाई दिए जो बेशक हरमन के हत्यारे को ढूंढता हुआ वहाँ पहुँचा था। क्योंकि तुम्हारे हिसाब से स्टेज पर दो अलग-अलग लोग थे इसलिए तुम्हारे लिए यह पता लगा पाना मुश्किल था कि हरमन को किसने मारा है। तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया। तुम्हें देखते ही मैंने लाइट बंद की और मास्टर लॉरेन की लाश को कुर्सी पर रखकर उनसे सात चक्रों और उस किताब के बारे में बात करने लगा। तुम्हारे मन में लालच घर कर चुका था। तुम चुपचाप वहाँ से चले गए। हरमन की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार मानकर तुमने शराब पीना शुरू कर दिया। जिस बार में तुम शराब पीने जाया करते थे उसी बार में तुम्हारी मुलाकात हुयी मेरी असिस्टेंट और मार्शन की बेटी वेनिशा से। फिर धीरे-धीरे तुम्हें उससे प्यार हुआ, उससे शादी की। वही तुम्हें गोवा लेकर गयी थी ना?। उसके बाद सब कुछ तुम्हारी आँखों के सामने हुआ। चर्च में तुम्हारा मार्शन से मिलना, उसका तुम्हें मेरी लिखी डायरी देना, फिर अभिमान शाह का तुम्हें पार्टी पर बुलाना, वगेरह-वगेरह। तुम्हें निकोलस तक पहुंचाने के लिए मेरा मरना उतना ही जरुरी था जितना तुम्हारे बदले के लिए मास्टर लॉरेन को जिन्दा रखना। मुझे खुद का ही घर उड़ाना पड़ा। मास्टर लॉरेन की डेड बॉडी फ्रांसिस की डेड बॉडी बनी। मैंने वही लिखा जो तुम चाहते थे। तुम उम्र में भले ही मुझसे बड़े हो जैक पर दिमाग में मुझसे काफी छोटे निकले। दादाजी सच कहा करते थे। इंसान का शक्तिशाली होना मायने रखता है। तरीका चाहे जो भी हो’

‘Good bye jack’… जाने दो इसे। वैसे भी अब इसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। फ्रांसिस ने अपने आदमियों को आदेश दिया। 

‘इसे जिन्दा छोड़ना ठीक नहीं है’ मार्शन ने फ्रांसिस की तरफ देखते हुए कहा। 

‘आप उसकी चिंता मत करो’ फ्रांसिस मुस्कुराया। 

जैक ने बाहर निकलकर जैसे ही अपनी कार स्टार्ट की एक जोरदार धमाका हुआ। देखते ही देखते जैक कार के साथ धूं-धूं करके जलने लगा।

‘यह तो खाली है’ मार्शन ने ब्रीफ़केस खोलते हुए कहा।

‘मैं जानता हूँ’ फ्रांसिस हँसा।

‘क्या!’ मार्शन परेशान था।

‘असली ब्रीफ़केस वेनिशा के पास है। मैंने एक हफ्ते बाद उसे मिलने के लिए कहा है। जब तक यह मामला ठंडा नहीं होता हमें जरा संभलकर रहना होगा। पूछताछ के लिए वेनिशा को बुलाया जाएगा। आप यहीं चर्च में ही रुकेंगे ताकि पुलिस को शक ना हो’

‘और यह ब्लास्ट वाली बात का क्या होगा’

‘पुरानी गाड़ी थी। गैस से चलती थी। हादसे हो जाते हैं कभी-कभी, आप फिकर मत कीजिए, बाकी मैं देख लूँगा। आप बस वेनिशा के साथ ठीक एक हफ्ते बाद कोलकाता में मिलिए। 

1 week later–

पुलिस की जाँच-पड़ताल में यह सिद्ध हो जाता है कि कार में धमाका उसमें रखे गैस के सिलिंडर की वजह से हुआ। एक हफ्ते बाद वेनिशा असली ब्रीफ़केस लेकर अपने पिता मार्शन के साथ कोलकाता पहुँचती है। 

‘हाय वेनिशा। तुमसे अच्छी असिस्टेन्ट कोई हो ही नहीं सकती’ फ्रांसिस ने वेनिशा को गले लगाया। 

‘कैसे हो मार्शन?’

‘जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन के इन्तजार में हूँ। जब तुम मेरी वेनिशा से शादी करोगे और इन सात चक्रों की मदद से दुनिया के सबसे शक्तिशाली जादूगर बन जाओगे’ मार्शन खुश था।

‘जरूर मार्शन। पर आपके बिना यह सब संभव नहीं था’ 

‘वेनिशा वो ब्रीफ़केस मुझे दो’ फ्रांसिस के इशारा करते ही वेनिशा उसे वह ब्रीफ़केस थमा देती है। 

फ्रांसिस जैसे ही ब्रीफ़केस खोलता है एक अजीब सी आवाज़ आती है। इससे पहले वह तीनो कुछ समझ पाते वेनिशा की नज़र ब्रीफ़केस के ऊपरी हिस्से के अंदरूनी भाग पर जाती है जिसपर कुछ लिखा हुआ था। फ्रांसिस पढ़ना शुरू करता है–

‘नमस्कार दोस्तों। सबसे पहले मैं आप तीनों को बधाई देना चाहूँगा कि आपने अभी-अभी जिस ब्रीफ़केस को खोला है अगर उसे जरा सा भी हिलाया या बंद करने की कोशिश की तो वह अपने आप ही ब्लास्ट हो जाएगा। सेल्फ डिस्ट्रक्शन, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी 2003 इसका मतलब आप तीनों का मरना तय है। इसलिए मैं चाहूँगा की आप जहाँ भी हैं वहीँ खड़े रहें और मरने से पहले कुछ जरुरी बातें जो शायद आपके लिए जानना जरूरी हैं उन्हें शांतिपूर्वक पढ़े।

शुरुवात करते हैं फ्रांसिस से। फ्रांसिस तुम्हारी कहानी तो अच्छी थी पर तुम्हारे किरदार निहायती बेवक़ूफ़ निकले। याद है जब पहली बार तुम मेरे गेराज आये थे तो मैंने एक रिपेयरिंग फॉर्म तुमसे भरवाया था और उसमें तुम्हारी डेट ऑफ़ बर्थ का भी कॉलम था। पर उस दिन जब मैंने तुम्हारी वाइफ अवंतिका, सॉरी, किराए की वाइफ अवंतिका से तुम्हारे बर्थडे के बारे पूछा तो उस बेचारी को सही तारीक भी पता नहीं थी। तारीक छोड़ो उसे सही महीना भी याद नहीं था। अजीब है ना?। अब शायद तुम सोच रहे होगे कि इतनी सी बात से तो मुझे शक नहीं होना चाहिए था। तो चलो तुम्हें बाकी की कहानी बताता हूँ। दरअसल सारी गलती तुम्हारे दूसरे किरदार वेनिशा की है। उस दिन जब तुम अपनी गाड़ी लेने आये तो मुझे घर पे ना पाकर तुमने वेनिशा को मेरा लॉकर चेक करने के लिए कहा ताकि तुम यह जान सको कहीं मेरे पास भी उन सात चक्रों का सही क्रम तो नहीं है। तुम्हारे हाथ तो कुछ नहीं लगा पर वेनिशा एक भूल कर बैठी। उसने लॉकर में रखे कुछ जरुरी कागजों को सही क्रम में लगा कर रख दिया। जबकि उन्हें सही क्रम में लगाने से ही उनका क्रम बिगड़ जाता है। अब अगर वेनिशा ने मेरा लॉकर खोला भी तो यह बात उसे मुझे बतानी चाहिए थी, जो कि उसने नहीं बताई। और इस तरह तुममें और वेनिशा में कुछ कनेक्शन है इस बात का मुझे एहसास हुआ। कुछ दिन बाद फिर जब मैंने वेनिशा को उसके अंकल के घर जाने के लिए कहा तो वह ट्रेन में तो चढ़ी पर अगले स्टेशन पर ही उतर गई। मैं उसी ट्रेन में था। जब मैंने उसका पीछा किया तो देखा वह अपने पूज्यनीय पिताजी मार्शन से गले मिल रही है। और इस तरह तुम तीनों का पूरा खेल मेरी समझ में आ गया। वेनिशा तुम सच में मेरा साया ही थीं। मैं वेगास गया तो तुम वहाँ भी जा पहुँची। उस दिन कसीनो में मुझे देखकर तुम तुरंत गायब हो गयीं, पर एक जादूगर की नज़रों से बचना इतना आसान नहीं होता वेनिशा। ख़ामोखां तुम्हारी वजह से लेनिन को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। 

इसके बाद जब निकोलस ने मुझे कुछ जरुरी बातें बतायीं तो मैं हैरान रह गया। निकोलस हमेशा से उन सात चक्रों की तलाश में था। जो भारत के सात अलग-अलग मशहूर जादूगरों के पास थे। निकोलस के पिता भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद पाकिस्तान जा पहुँचे। तब निकोलस मात्र 6 महीने का था। उसी बंटवारे में भारत के कुछ जादूगर भी थे जिनके पास बाकी के चक्र थे। निकोलस जब बड़ा हुआ तो उसने उन चक्रों को एक-एक करके हासिल करना शुरू किया। अब उसे सिर्फ बाकी के बचे चक्रों की तलाश थी जो भारत में थे। फिर जब ईस्ट पाकिस्तान में लिबरेशन वॉर छिड़ा तो वह रिफ्यूजी बनकर भारत आया और यहाँ आकर उसने अपना अधूरा काम शुरू कर दिया। अब उसे सिर्फ आखरी चक्र की तलाश थी। जो तुम्हारे डैड यानी कि जादूगर डैनियल के पास था। वह तुमसे मिला। रहनुमा बनकर। तुम्हारे जरिये उसे पता चला कि तुम्हारी माँ और डैड कुछ जरुरी काम से बैंक गये हैं। दरअसल उन्हें भनक लग चुकी थी भारत में मौजूद बाकी के चक्र चोरी हो चुकें है, इसलिए वह उस आखरी चक्र को कोलकाता से बॉम्बे भेजना चाहते थे। पर रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी। उनमें से जिस एक इंसान का चेहरा तुम नहीं देख पाए थे वही निकोलस था।
 
उस दिन बॉम्बे जाने से पहले तुम आये थे उससे मिलने पर वह जा चुका था।

रहनुमा ही निकोलस है इस बात का एहसास तुम्हें तब हुआ जब सरथ अंकल ने तुम्हें वह डायरी दी। उस डायरी के पहले पेज पर ठीक वैसे ही निशान थे जैसे रहनुमा अपनी उँगलियों से जमीन पर बनाया करता था। उस दिन के बाद निकोलस की मौत ही तुम्हारा पहला लक्ष्य था। उसके साथी जोशी को तो तुमने यहाँ आते ही मार दिया था। और निकोलस तक पहुँचने के लिए तुमने मेरा इस्तेमाल करना चाहा। निकोलस को मारने की मेरे पास कोई वजह नहीं थी। लेकिन तुम चिंता मत करो वह कुछ दिनों में वैसे भी मर जाएगा। 

उस दिन जब तुम कंपनी से इस्तीफ़ा देकर वापिस लौट रहे थे तो शायद तुम खुद के अंदर की आग को और भड़काने के लिए वापिस उसी जगह पहुँचे जहाँ रहनुमा रहा करता था, और खुशकिस्मती से तुम्हारी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुयी जिसे तुम आज तक मास्टर लॉरेन समझते रहे। कहानी बाकई दिलचस्प है। जो तुम्हारे साथ था वह दरअसल डेविड था। मास्टर लॉरेन का असिस्टेन्ट। मास्टर लॉरेन के अलावा एक डेविड ही था जो उन चक्रों का सही क्रम जानता था। जब पहली बार मास्टर लॉरेन ने उसे अपनी जगह परफॉर्म करने का मौका दिया तो उसने मास्टर लॉरेन को रास्ते से हटाने के लिए प्लान बनाया। उसने बॉक्स को ऐसी जगह सेट किया जिसने ठीक नीचे तहखाने में आग की भट्टी जलती रहती थी। बॉक्स की जगह बदलने की वजह से मास्टर लॉरेन को शक हो गया और वह उसके चंगुल से बच निकले। उसे हमेशा यही लगता रहा कि वह अपने मक़सद में कामयाब हो गया है। लेकिन मास्टर लॉरेन एक ऐसे जादूगर थे जो इंसान तो क्या मौत की आँखों में भी धूल झोंक सकते थे। 

उस वक्त मैं बॉम्बे में था जब मुझे पता चला कि यहाँ कोलकाता में कोई वही मैजिक ट्रिक्स कर रहा है जो मास्टर लॉरेन किया करते थे। मैं वापिस कोलकाता आया और अपने दोस्त हरमन को किसी तरह यह पता लगाने के लिए कहा कि स्टेज पर परफॉर्म करने वाला इंसान सच में फ्रांसिस है या कोई और? शायद मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। डेविड ने जो किया उसकी सजा अनजाने में ही सही लेकिन तुम उसे दे चुके हो। अब अगर कुछ बाकी है तो वह है हरमन की मौत का बदला। 

मैं चाहता हूँ तुम्हारे मरने से पहले तुम्हें एक आखरी सच से रूबरू करा सकूँ। मेरा नाम हरमन नहीं है यह तो तुम जान ही चुके हो। दरअसल मेरा नाम जैक डी’क्रूज भी नहीं है। मेरा असली नाम फ़राज़ है। फ़राज़ हमीम अली। 

मेरा जन्म कहने के लिए तो हिंदुस्तान की जन्नत कश्मीर में हुआ लेकिन वहाँ के हालात ने मुझे जहन्नुम में धकेल दिया। वह साल कॉलेज में मेरा आखरी साल था। मैं अपने अम्मी-अब्बू के साथ एक छोटे से घर में रहता था। अब्बू मकैनिक थे और माँ घर का काम संभालती थी। हम सब खुश थे। पर बहुत जल्द हमारी खुशियों को नज़र लग गयी। मुझे आज भी याद है, दंगे भड़कने के कारण मैं उस दिन कॉलेज से जल्दी घर आ गया था। लोगों का हुजूम सड़कों पर उमड़ रहा था। पत्थर फेंके जा रहे थे, लोग एक दूसरे को जान से मारने पर तुले हुए थे। सरेआम इंसानियत को शर्मसार किया जा रहा था। अम्मी-अब्बू जैसे ही गेराज बंद करके आये उन्होंने दरवाज़े पर दस्तक दी। मैंने दरवाजा खोला। पर उनके घर में कदम रखने के पहले ही किसी ने उनपर गोलियों की बारिश कर दी। मैंने पलटकर देखा तो वह फैज़ान था। वही फैज़ान जिसके अम्मी-अब्बू को मैं बचपन में बचा नहीं पाया था। फैज़ान पूरी तरह अपना मानसिक संतुलन खो चुका था। अम्मी-अब्बू पर गोली चलाने के बाद उसने खुद को शूट कर लिया। मेरे अम्मी-अब्बू ने मेरी आँखों के सामने ही दम तोड़ दिया। 

मैं सब कुछ छोड़कर कोलकाता आ गया। यहाँ आकर मैंने अपना धर्म बदल लिया। यहाँ के एक महान जादूगर समुद्रसेन को अपना गुरु बनाकर उनसे जादू सीखा। उन्होंने मुझे नई जिंदगी दी, नया नाम दिया। 

तुम्हारी डायरी में लिखी बाकी सारी बातें भले ही झूठी हों फ्रांसिस, पर एक बात बिलकुल सही है। अब मैं हर जगह हूँ, और कहीं भी नहीं। 

तुम जानते हो जादूगर समुद्रसेन ने मुझे नया नाम क्या दिया?

–मास्टर लॉरेन एल्बर्ट वेल्स।

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6 thoughts on “The Magician: Story 

  1. Thanks for stopping by, if you do one favor on me then will be more glad, actually you have followed my old WordPress.com blog which I have migrated to tuneupsuccess.com self hosted blog, as the old blog not updated for long time so please follow the same. Thanks once again for your valuable time.

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