Book review: Theek Tumhare Peeche| Story 5

 A book by Manav kaul…


आज की कहानी- लकी


आज की कहानी का मुख्य पात्र है लकी। लकी किसी भी इच्छा को दबाकर नहीं रखना चाहता। उसके पिताजी एक ज्योतिष हैं। लकी चाहता है कि उसके हाथ का तिल किसी तरह उसकी मुट्ठी के भीतर बंद हो सके। ताकि पिताजी के अनुसार सब ठीक हो। लकी की माँ जब उससे पूछती कि वह क्या करना चाहता है तो वह बस इतना कहता है कि वह लिखता है और उससे अनुसार यह भी कुछ करने जैसा ही है। उसकी बहन आशा को उसके पिताजी घर से बेदखल कर चुके हैं, क्योंकि उसने एक मुसलमान से शादी की। अब वह नमाज़ पढ़ती है। लेकिन उसमें भी उसने सुकून ढूंढ लिया है। कुछ समय पहले लकी आशा की सहेली अंतिमा से मिला था। वह पॉटरी करती थी। जब दोनों कैंटीन में चाय पीने गये तो लकी अपने हाथ की ढेरों अंगूठियां छुपाने लगा। अंतिमा ने उसे बताया कि किस तरह उसके गुरु इक़बाल भाई कुछ पॉट बनाकर तोड़ देते हैं। इससे उन्हें अच्छा लगता है। लकी ने भी अपनी कुछ कहानियाँ फाड़ कर फ़ेंक दीं। उसी “अच्छा” लगने के लिए। लकी को कोरे पन्नो से खेलना पसंद है। वह उसमें लिखे जाने वाले अक्षरों के आकार के बारे में सोचकर खुश होता है। एक दिन वह फिर अंतिमा से मिलने जाता है। पर उसे इकबाल भाई के साथ आते देख उससे मिलने का मन बदल लेता है। उसे लगता है कि शायद उससे मिलने का उसके पास कोई कारण ही नहीं है। एक दिन पिताजी आशा को घर बुलाने के लिए कहते हैं। आशा का जन्मदिन था। वह अपने पति आसिफ के साथ घर पहुँचती है। पिताजी अचानक सब धर्मों की इज्जत पर बात करते हैं। लकी एक और कहानी लिखता है जिसका नाम वह “अंत” रखता है। पर पता नहीं क्यों उस अंत में छोटी इ की मात्रा और मा जोड़कर वह उसे अंतिमा कर देता है। 


मानव  कॉल की यह कहानी रिश्तों की टुकुर-मुकुर दर्शाती है। पिताजी जो ज्योतिष हैं वह अन्धविश्वास में विश्वास रखते हैं। उन्हें डर है कि कहीं लकी में यह बदलाव कालसर्प योग की वजह से तो नहीं हो रहा है। माँ को जब टीवी देखने से फुर्सत मिलती है तो वह लकी की चिंता लेकर बैठ जाती हैं। और बहिन ससुराल में भगवान की मूर्ती अलमारी में छुपाएं बैठी है। मानव ने दिखया है कि घर में किसी का रिक्त स्थान कभी भरा नहीं जा सकता। जैसे लकी अपनी बहिन का नहीं भर पाता। कहानियाँ फाड़ने वाली बात यह कहती है कि हर बार अच्छा ही हो यह जरुरी नहीं है। और जो अच्छा नहीं है उसे सहेज कर रखने की कतई जरुरत नहीं है। नमाज़ में सुकून ढूंढने वाली बात का अर्थ है कि इबादत किसी मज़हब की मोहताज़ नहीं है। पिताजी का आसिफ से मिलते ही विचार बदलना दर्शाता है कि इंसान का किरदार अच्छा होना ही मायने रखना है। और मिट्टी को नोचने, फाड़ने वाली बात का मतलब यह है कि कभी-कभी अपने अंदर की बेचैनी को निकलने का रास्ता देना चाहिए। मानव की यह कहानी निश्चित रूप से हम में से कईं लोगों की कहानी हो सकती है। एक और कहानी किताब में चार-चाँद लगाने में सफल हुयी। 


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