Film review: Jagga jasoos

Movie: Jagga jasoos

Release date: 14 July

Cast: Ranbir kapoor, Katrina kaif, Saurav shukla, Saswata chatterjee, Sayami gupta

Story: Anurag basu
Direction: Anurag basu

Language: Hindi

कहानी–

कहानी की शुरुआत पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से होती है जहाँ सन् 1995 में एक अज्ञात हवाईजहाज बन्दूकों से भरे बॉक्स जमीन पर फेंककर गायब हो जाता है। कुछ सालों के अंतराल के बाद कहानी आगे बढ़ती है और वर्तमान की ओर रुख करती है, जहाँ श्रुति सेनगुप्ता( कैटरीना कैफ) बच्चों को जग्गा(रणबीर कपूर) और उसकी जासूसी की अलग-अलग कहानियाँ सुनाती है। जिसमें पहली कहानी होती है “द रेड सर्किल” जिसमें जग्गा की मुलाकात होती है ज़ख्मी प्रोफ़ेसर बादल बागची (सास्वता चेटर्जी) से जिसे वह उसी हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर जाता है जहाँ उसने माँ-बाप के गुज़र जाने के बाद अपना बचपन गुज़ारा था। ठीक होते ही बागची जग्गा को अपने साथ ले जाता है पर किसी कारणवश वह उसके साथ ज्यादा दिन नहीं बिता पता और उसे वापिस उसी हॉस्पिटल को सौंपकर कुछ महीनों में लौटकर आने का कहकर कहीं गायब हो जाता है। धीमे-धीमे जग्गा बड़ा हो जाता है और उसकी रूचि जासूसी में बढ़ने लगती है। दूसरी कहानी है “मिस्ट्री ऑफ़ क्लॉक टावर” जिसमे जग्गा अपनी स्कूल टीचर मिस माला का सुसाइड केस सॉल्व करता है। और तीसरी कहानी है “जग्गा जासूस एंड मर्डर ऑन जायंट व्हील”जिसमें उसकी मुलाकात कोलकाता से आईश्रुति से होती है। कुछ दिनों बाद जग्गा को पता चलता है कि उसके पिता बादल बागची की एक हादसे में मौत हो गयी। जब वह एक्स आई.बी ऑफिसर सिन्हा (सौरव शुक्ला) से मिलता है तो उसे शक होता है कि बागची जिन्दा है और उसके गायब होने के पीछे की कहानी के तार ऑफिसर सिन्हा, बर्मा से हथियार सप्लाई करने वाले आर्म्स डीलर बसीर एलेग्जेंडर और 1995 में पुरुलिया हुए हादसे से जुड़े हुए हैं। और इस तरह वह अपने टूटीफूटी यानी कि अपने पिता बादल बागची की तलाश में निकल पड़ता है। 

Reveiw–

पिछले कुछ सालों से प्रोडक्शन में अटकी जग्गा जासूस अंततः रिलीज़ हुई। फिल्म एक म्यूजिकल सस्पेंस थ्रिलर ड्रामा है जिसका निर्माण डिज्नी ने किया है। 

पटकथा- बॉलीवुड में पहली बार इस तरह की कहानी को पर्दे पर लाया गया है। पटकथा को भी म्यूजिकल बनाया गया है और इसके अधिकतर संवाद गाकर कहे गए। जहाँ फर्स्ट हॉफ अलग-अलग कहानियों का मिश्रण है वहीं सेकंड हॉफ जग्गा और उसके खोये हुए बाप की कहानी है। सेकंड हॉफ को थोड़ा और मजबूत किया जा सकता था। अंत कुछ और हो सकता था। संवाद अच्छे हैं। कहानी साधारण किन्तु खूबसूरत और कई जगह पर बहुत प्रभावशाली है। कुछ दृश्य हालाँकि आवश्यक नहीं थे और शायद वही थोड़ी तकलीफ दे सकते हैं। 

निर्देशन–अनुराग बासु ने एक बार फिर रणबीर कपूर के अभिनय की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया है। निर्देशन निश्चित तौर पर शानदार है। कुछ दृश्य बेहद खूबसूरत हैं। सिनेमेटोग्राफी लाजवाब हुयी है। पटकथा पर भी उन्होंने अच्छा काम किया है। कुछ दृश्य जे.के रॉलिंग के हॉगवर्ट्स से प्रेरित लगते हैं। अनुराग बासु ने फिल्म को ऐसे मोड़ पर खत्म किया है जिसे देखकर लगता है कि शायद भविष्य में सीक्वल बनाई जा सकती है। फिलहाल यह एक सम्पूर्ण फिल्म है।

अभिनय– रणबीर कपूर ने अपना सवश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है। गूफी किरदार में कैटरीना भी ठीक-ठाक लगीं। सास्वता चेटर्जी और सौरव शुक्ला ने अच्छा अभिनय किया है। अन्य किरदार भी अच्छे थे। हर कलाकार के अभिनय पर अच्छा काम किया गया है। कैटरीना कैफ के बोलने का अंदाज थोड़ा और सुधारा जा सकता था। 

संगीत– संगीत बहुत अच्छा है। अमिताभ भट्टाचार्य ने गीत पर अच्छा काम किया है। गलती से मिस्टेक, उल्लू दा पट्ठा, फिर वही, पहले ही हिट हो चुके हैं। अन्य गाने भी अच्छे हैं। 

अगर आप एक अच्छा म्यूजिकल ड्रामा,अच्छी सिमेमटोग्राफी और डिज्नी के एडवेंचर्स देखना पसंद करते हैं तो यह फिल्म आपके लिए ही है। अगर कुछ द्रश्यों को हटा दिया जाए तो रणबीर कपूर के शानदार अभिनय और अनुराग बासु की कड़ी मेहनत के लिए फिल्म को एक बार अवश्य देखा जा सकता है। 

AKB rating–3.5/5

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