Movie review: Toilet Ek Prem Katha 

Film: Toilet Ek prem katha

Release date: 11 Aug 2017

Cast:  Akshay kumar, Bhumi pednekar, Sudhir pandey, Divyendu sharma, Anupam kher, Sana khan, Rajesh sharma

Story: Siddharth singh, Garima wahal

Direction: Shree narayan singh

Language: hindi

कहानी– 

फिल्म की शुरुआत होती है केशव (अक्षय कुमार) से। केशव का मांगलिक दोष हटाने के लिए उसके पिताजी (सुधीर पांडेय) उसका विवाह एक भैंस के साथ करवा देते हैं। 36 साल के केशव को लगता है कि अब उसकी शादी के द्वार लगभग खुल ही चुकें हैं। एक दिन जब वह अपने पिताजी की दुकान के काम से कहीं जा रहा होता है तब उसकी मुलाकात ट्रैन में मौजूद जया(भूमी पेडनेकर) से होती है। कुछ मुलाकातों के बाद धीमे-धीमे दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है और वह विवाह के बंधन में बंध जाते हैं। लेकिन असली बखेड़ा तो तब खड़ा होता है जब जया को ससुराल आकर पता चलता है कि घर में शौचालय ही नहीं है। जया को इस मुसीबत से बचाने के लिए केशव हर तरह की जुगाड़ अपनाता है पर बात नहीं बन पाती और एक दिन जया केशव को छोड़कर अपने मायके चली जाती है। देखते-ही-देखते बात तलाक तक पहुँच जाती है। जब केशव को अपनी गलती का एहसास होता है तो वह किसी तरह गांव में शौचालय लाने का प्रयास शुरू करता है। क्या समाज की पुरानी परंपराओं को तोड़ते हुए केशव घर में शौचालय बनवाकर जया को वापिस ला पाएगा? इसके लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा।
Review–

आज भी गांव में शौचालय न होना आम बात है। सरकार द्वारा मिल रही मदद से तब तक कुछ नहीं होगा जब तक हम खुद इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आगे नहीं आएंगे। यही फिल्म का मुख्य उद्देश्य है। 

पठकथा– पठकथा पर निश्चित रूप से अच्छा काम हुआ है। संवाद बेहतरीन है। कहानी को हर इंसान के नज़रिए से दिखाने का प्रयास किया गया है ताकि उसका समाधान निकाला जा सके। शौचालय की समस्या के साथ-साथ कुछ खोखली परंपराओं का भी विरोध किया है। राब्ता फ्लॉप होने के बाद सिद्धार्थ-गरिमा के लिए यह फिल्म एक अच्छे कमबैक के रूप में साबित हो सकती है। 

निर्देशन- निर्देशक के तौर पर यह श्री की दूसरी फिल्म है। बावजूद इसके निर्देशन कसा हुआ है। सिनेमेटोग्राफी अच्छी हुयी है। कुछ कलाकारों से थोड़ा और काम लिया जा सकता था। 

अभिनय– फिल्म की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है अच्छा अभिनय। यदि अभिनय पठकथा के अनुसार न हुआ होता तो फिल्म के मायने और मकसद दोनों बदल सकते थे। लेकिन अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर ने केशव और जया के किरदारों को बखूबी निभाया है। पिताजी के रूप में सुधीर पांडेय भी लाज़वाब लग रहे हैं। प्यार का पंचनामा फेम दिव्येन्दु शर्मा को कौन भूल सकता है। अक्षय कुमार के छोटे भाई के रूप में उन्होंने जान डाल दी। अन्य किरदार भी हँसते-हँसाते नज़र आये। 

संगीत– संगीत एवरेज है। जरुरत के हिसाब से ठीक है। 

अच्छी कॉमेडी, बेहतर रोमांस, और सही सन्देश से सजी इस फिल्म को अवश्य देखें। 

AKB rating– 4/5

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