Movie review: Baadshaho

Film: Baadshaho

Release date: 1 September

Cast: Ajay devgn, Ileana D’cruz, Emraan hashmi, Sanjay mishra, Esha gupta, Sharad kelkar, Vidyut jammwal 

Story: Rajat arora

Direction: Milan luthria

Language: Hindi 

कहानी– 

कहानी की शुरुआत होती है जयपुर की महारानी गीतांजली (इलियाना डीक्रूज) के महल में चल रही एक पार्टी से। पार्टी के कुछ दिनों बाद ही सरकार गीतंजली के महल में छुपे सोने को जब्त करने के लिए पुलिस फोर्स भेजती है। महल से बड़ी मात्रा में सोना जब्त होने के कारण गीतांजली को गिरफ्तार कर लिया जाता है। जब जेल के अंदर गीतांजली की मुलाकात उसके पुराने अंगरक्षक भवानी(अजय देवगन) से होती है तो वह उसे बताती है कि किस तरह उसका सारा का सारा सोना एक गुप्त तरीके से सरकार के निजी फायदे के लिए दिल्ली भेजा जा रहा है। भवानी उससे वादा करता है कि वह सोना जयपुर से बाहर नहीं जाएगा और फिर जेल से निकलते ही वह अपने पुराने दोस्त दलिया(इमरान हाशमी) और टिकला उर्फ़ गुरुजी(संजय मिश्रा) की मदद इस से चोरी को अंजाम देने की प्लानिंग शुरू करता है। जहाँ एक तरफ सोना सुरक्षित दिल्ली पहुँचाने की जिम्मेदारी आर्मी ऑफिसर सहर(विद्युत जामवाल) के कंधों पर है वहीं दूसरी तरफ सोने को जयपुर से हर हाल में बाहर जाने से रोकने के लिए भवानी भी तैयार है। क्या होगा जब दोनों आपस में टकराएंगे? इसके लिए फिलहाल आपको तब तक इन्तजार करना पड़ेगा जब तक आप सिनेमाघर नहीं जाते। 


Reveiw–
कहानी इमरजेंसी के आसपास की तो बताई गयी है पर उसमें इमरजेंसी का नामोनिशान तक नहीं है। रानी की एक पर्सनल असिस्टेंट है जो मॉडर्न कपड़े पहनती है। एक हाईटेक ट्रैक से जिससे सोना ले जाया जाता है। 1975 के भारत के दौरान ये बातें कुछ हज़म नहीं होती हैं। 

पटकथा- रजत अरोरा एक अच्छे लेखक हैं पर इस बार कहानी बेहद कमजोर रह गयी। कहानी को उस समय के मद्दे नज़र रखते हुए अगर लिखा होता तो फिल्म वाक़ई मजेदार हो सकती थी। संवाद अच्छे हैं। कहीं-कहीं तो बहुत भारी हैं पर सिर्फ संवाद भरी होने से फिल्म नहीं चलती, पूरी पटकथा को अच्छे से रचने की जरुरत थी। सेकंड हाफ को शायद जल्दबाज़ी में पूरा किया गया है। सस्पेंस प्रेडिक्टेबल था।   अंत अच्छा लिखना चाहिए था। 

निर्देशन– निर्देशन एवरेज है। मिलन लूथरिया ने ‘वन्स अपॉन या टाइम इन मुम्बई’ और ‘द डर्टी पिक्चर’ जैसी अच्छी फिल्मों का निर्देशन किया है इसलिए उनसे अपेक्षा ज्यादा थी। जब कहीं कहानी कमजोर लगे तो निर्देशक को किसी तरह उस सीन को अलग बनाने का प्रयास करना चाहिए। वह प्रयास आज गायब दिखा। शरद केलकर जैसे अभिनेता का सही से इस्तेमाल नहीं किया गया। सिनेमेटोग्राफी अच्छी है। 

अभिनय– अभिनय ही एक ऐसी चीज़ थी जिसने दर्शकों को अंत तक बैठने दिया। सभी ने अभिनय अच्छा किया है। भवानी के रूप में अजय देवगन ठीक लगे। इमरान हाशमी और संजय मिश्रा हँसते-हँसाते नज़र आये। इलियाना भी महारानी के किरदार में ठीक लगी। ईशा गुप्ता अच्छी अभिनेत्री हैं पर इस फिल्म में उनका किरदार कमजोर था। विद्युत जामवाल ने कमांडो 2 की अपेक्षा अच्छा काम किया। उन्हें अपने हाव-भाव पर थोड़ी और मेहनत करनी चाहिए। शरद केलकर ने अपने छोटे से किरदार को भी बखूबी निभाया। 

म्यूजिक– संगीत एवरेज है। रश्क़-ए-कमर और  होशियार रहना अच्छे गीत हैं। 
अगर फिल्म में मौजूद सभी कलाकार आपको पसंद हैं और आपके लिए कहानी ज्यादा मायने नहीं रखती तो अच्छे अभिनय और एक्शन से सजी इस फिल्म को एक बार अवश्य देख सकते हैं। 

AKB rating– 2.5/5

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2 thoughts on “Movie review: Baadshaho

  1. Very nice review.
    Yah, watching the trailer it seemed its a movie on emergency time during 1975.the dialogue (Superbly delivered) by Ajay Devgan…”Woh Army thi par hum bhi toh…the” caught my attention.
    Surprised to know about the modern dress and the high tech track…really does not match with the time period.
    Will watch the movie specially for Ajay Devgan, Illeana D’Cruz, Bidyut are also my fav.

    Liked by 1 person

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