Movie review: Kadvi Hawa

Film: Kadvi Hawa

Release date: 24 November 2017

Cast: Tillotama shome, Sanjay mishra, Ranvir shorey

Story: Nitin dixit

Direction:  Nila madhab panda

Language: Hindi 

कहानी–
कहानी की शुरुआत होती है धौलपुर जाने वाली बस पकड़ने के लिए बंजर जमीन से गुजरते एक बूढ़े अंधे किसान हेड़ू(संजय मिश्रा) से। धौलपुर जाकर वह सम्बंधित बैंक से अपने बेटे का बकाया क़र्ज़ जानने की कोशिश करता है। सूखे के कारण लिया क़र्ज़ जब मुसीबत बन जाता है तो गाँव का एक व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। इस बात से परेशान हेड़ू, गाँव में कर्ज़े की राशि वसूल करने आये गुन्नू बाबू(रणवीर शौरी) से समझौता करता है। वह उसकी क़र्ज़ वसूली में मदद करने के बदले उसके बेटे मुकुंद(रूपेश सिंह) का पीछा छोड़ने की शर्त रखता है। बदलती हवा और बदलता जलवायु कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ लेकर आता है। फिल्म आगे क्या मोड़ लेती है यह जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा। 

Review–

फिल्म को पहले ही क्रिटिक्स द्वारा सराहा जा चुका है। बदलते जलवायु एवं उसके होने वाले दुष्प्रभावों को दर्शाना ही फिल्म का मुख्य उद्देश्य था। बंजर जमीन, जर्ज़र हालात और तड़पते लोग। स्थिति निश्चित रूप से दयनीय है।

पटकथा:  फिल्म की कहानी और पटकथा दोनों का निर्माण नितिन दीक्षित द्वारा किया गया है। कहानी को बुंदेलखंड के आस-पास रचा गया है। पटकथा सरल किन्तु प्रभावशाली है। डायलॉग्स अच्छे हैं। बस कहीं-कहीं बोली एकदम से बदलती हुयी नज़र आती है। यही देखा जाए तो यह कम संवादों में अधिक कहने वाली फिल्म है।

निर्देशन: आप जब गाँव की पृष्ठभूमि पर फिल्म बनाते हैं तो निर्देशन चुनौतीपूर्ण होता है। नील माधव पंडा ने निश्चित रूप से उस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया है। निर्देशन सराहनीय है। कलाकारों से सही काम लिया है। फिल्म में हालांकि कुछ और तत्व डाले जा सकते थे। 

अभिनय: संजय मिश्रा ने एक अंधे किसान के किरदार को जिस तरह निभाया है वह काबिल-ए-तारीफ है। वह जब भी पर्दे पर आते हैं अपनी छाप छोड़ने में सफल रहते हैं। आँखों देखी और मसान जैसी फिल्मों के बाद उन्हें कड़वी हवा के लिए भी लंबे अरसे तक याद रखा जाएगा। रणवीर शौरी ने एक बार फिर कमाल का अभिनय किया है। दिबाकर बैनर्जी द्वारा निर्देशित “खोसला का घोसला” और कनु बेह्ल की “तितली” में वह पहले ही साबित कर चुके हैं कि वह कितने बड़े कलाकार हैं। तिलोत्तमा शोम भी घरेलु कामकाजी महिला के रूप में अच्छी लग रही हैं। अन्य किरदार भी ठीक-ठाक लगे। 

संगीत- फिल्म में सिर्फ एक ही गाना है जो अच्छा है। बैकग्राउंड स्कोर खूबसूरत है। 

अच्छे कलाकारों से सजी इस फिल्म को विषय की गंभीरता समझने के लिए एक बार अवश्य देखना चाहिए। 
AKB rating– 4/5 

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