सवाल

​माना जवाब उनका बवाल वाला था  सवाल भी उनका कहाँ सवाल वाला था। Advertisements

दरख़्त। 

​दरख़्त जब रोते होंगे पत्ते रुख़्सत होते होंगे। दरख़्त– पेड़। रुख़्सत–अलग। 

प्रेम

​उसने अचानक से मुझे जकड़ लिया था। उसने इतनी जोर से मुझे अपनी तरफ खींचा था कि हमारे बीच मौजूद हवा चींखकर हमसे अलग होते हुए मेज़… Read more “प्रेम”

एक डर

​वह बहुत देर से वहीं बैठा था। गर्दन झुकाएं अपने पैरों को लगातार ताकते हुए। उसके पैरों में मिट्टी की कई परतें जमा हो चुकी थीं। जैसे… Read more “एक डर”

Evening post

यूँ सन्नाटे में जो खुद को सुनने का साहस रखते हो हो यार मुबारक तुम खुद को चुनने का साहस रखते हो।