Evening post

उन्हें लगता है कि मैं इश्क़ बेपनाह कर बैठा मुझे मालूम है मैं एक और गुनाह कर बैठा। 

अब तो इश्क़-विश्क, प्यार-व्यार ढूंढे नहीं मिलता क्यों न घर चला जाए, वहाँ माँ रहती है। 

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काम उसने कुछ ऐसा किया उम्र भर मौत पर भी वो अपनी शर्मिंदा रहा मरते-मरते भी उसको सुकून न मिला देह तो जल गयी पर वो जिन्दा… Read more “Evening post”